केंद्र की मोदी सरकार चंडीगढ़ को लेकर एक महत्वपूर्ण प्लान तैयार कर रही है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत चंडीगढ़ को शामिल करने की तैयारी चल रही है। इसका सीधा मतलब यह होगा कि चंडीगढ़ में भी एक लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त होगा। अन्य केंद्र शासित प्रदेश भी इसी मॉडल पर चलते हैं।
खबर है कि इस बार के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार इस संबंध में विधेयक पेश कर सकती है। लेकिन इसके पेश होने से पहले ही पंजाब की राजनीति में भूचाल आ चुका है। पक्ष और विपक्ष, दोनों ही इसका विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दो टूक कहा है कि पंजाब के साथ अन्याय कर उसके हक को कमजोर किया जा रहा है।
अब सरल भाषा में समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर चंडीगढ़ को लेकर पूरा विवाद है क्या, और क्यों पंजाब व हरियाणा लगातार इसे लेकर भिड़ते रहते हैं।
चंडीगढ़ की वर्तमान स्थिति क्या है?
चंडीगढ़ वर्तमान में पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी है। दावा दोनों ही करते हैं कि चंडीगढ़ उनकी राजधानी है, लेकिन पिछले कई दशकों से एक ऐसी सहमति बनी हुई है जिसके तहत इसे संयुक्त राजधानी का दर्जा दिया गया है।
आर्टिकल 240 क्या है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 240 उन केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन से जुड़ा है जिनके पास अपनी कोई विधायिका नहीं होती। इस सूची में वर्तमान में अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली आदि आते हैं। अगर नया विधेयक पारित हो जाता है, तो चंडीगढ़ भी इस सूची में शामिल हो जाएगा। दूसरे शब्दों में- चंडीगढ़ में एक स्वतंत्र प्रशासक (Administrator/LG) नियुक्त किया जाएगा।
चंडीगढ़ की जिम्मेदारी अभी कौन संभालता है?
फिलहाल पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में कार्य करते हैं। राजधानी भले ही संयुक्त हो, लेकिन प्रशासनिक शक्ति लंबे समय से पंजाब के राज्यपाल के पास रही है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो यहाँ भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और प्रशासक की नियुक्ति केंद्र के स्तर से की जाएगी।
चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और हरियाणा के क्या दावे हैं?
चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की राजधानी बनाए जाने के बाद से ही दावेदारी का विवाद जारी है। पंजाब का तर्क- चंडीगढ़ में पंजाबी भाषी आबादी अधिक है। इसलिए यह पंजाब की राजधानी होनी चाहिए। हरियाणा का तर्क- यहां हरियाणवी/हिंदी भाषी आबादी भी बड़ी संख्या में है, इसलिए इसका अधिकार हरियाणा का होना चाहिए। दोनों राज्यों ने ऐतिहासिक, भाषाई और प्रशासनिक तर्क देकर इसे अपने पक्ष का मुद्दा बनाया हुआ है।
चंडीगढ़ का इतिहास क्या है?
सरकारी दस्तावेज़ों के मुताबिक आज का चंडीगढ़ क्षेत्र प्राचीन काल में सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा माना जाता है। 1947 में विभाजन के बाद लाहौर पाकिस्तान में चला गया। ऐसे में पूर्वी पंजाब (जो भारत में रहा) के पास अपनी कोई राजधानी नहीं बची। इसी कमी को दूर करने के लिए 1950 के दशक में एक नई आधुनिक राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया और इसी नए शहर का नाम रखा गया चंडीगढ़।
हरियाणा कैसे अस्तित्व में आया?
आजादी के बाद पंजाब एक बड़ा राज्य था; उस समय अलग से हरियाणा नाम का कोई राज्य नहीं था।लेकिन 1966 में Punjab Reorganisation Act लाया गया। इसके तहत पंजाब का भाषा के आधार पर विभाजन किया गया- पंजाबी भाषी क्षेत्र बना पंजाब, हिंदी/हरियाणवी भाषी क्षेत्र बना हरियाणा। इसी पुनर्गठन के बाद हरियाणा राज्य अस्तित्व में आया, और तभी से चंडीगढ़ को लेकर विवाद भी तेज हो गया।
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