Delhi Blast News: दिल्ली धमाके के आरोपी आतंकी उमर नबी अपने दूसरे साथियों जैसा नहीं था, वो हर बात पर उनसे सहमत नहीं होता था, विचारधारा को लेकर फर्क था, आर्थिक फैसलों को लेकर मनमुटाव था और जैश के आतंकी मॉड्यूल पर भी सवाल थे। इसी वजह से दिल्ली धमाके से पहले आतंकी आदिल रठार की शादी में भी उमर नहीं गया था।

दोस्त की शादी में नहीं गया था उमर

रठार की शादी के बाद जमीन पर कुछ समीकरण बदले और मुफ्ती इरफान वाघे को कश्मीर घाटी से गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी ने उमर को डरा दिया और वो तुरंत कश्मीर भागा और वापस अपने साथियों को एकजुट करने में लग गया। इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि ज्यादातर मौकों पर आतंकी मुजामिल गनई, रठार और वाघे के विचार उमर नबी से नहीं मेल खाते थे। एक तरफ इन तीनों का ग्रुप अलकायदा को ज्यादा मानता था तो वहीं उमर ISIS से ज्यादा प्रभावित था।

अलकायदा बनाम ISIS की विचारधारा

एक सूत्र ने इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस को कहा कि अलकायदा तो पश्चिमी संस्कृति को निशाने पर लेता है, अपने दूर के दुश्मनों को मारता है, लेकिन ISIS कैलिफेट में मानता है। ये भी जानकारी मिली है कि वाघे को छोड़कर बाकी आरोपियों ने अफगानिस्तान में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन जब कामयाबी नहीं मिली तो भारत पर ही हमले की साजिश बनी।

बुरहान वानी का उत्तराधिकारी बनना चाहता था उमर

सूत्रों के मुताबिक उमर खुद को मिलिटेंट बुरहान वानी और जाकिर मूसा का उत्तराधिकारी समझने लगा था, वो 2023 से ही IEDs को लेकर अपनी रिसर्च कर रहा था। अब उमर के पास जानकारी तो थी, लेकिन उसके काम करने का तरीका को को रास नहीं आ रहा था। जिस तरह से फंड्स का इस्तेमाल हो रहा था, उस वजह से उमर पर उसी के साथ कई सवाल उठा रहे थे। बताया जा रहा है कि ज्यायदातर फंड अल फलह यूनिवर्सिटी के शाहीन शाहिद अंसारी नाम के शख्स से आ रहा था।

काजीगुंड की सीक्रेट मीटिंग और बड़ी साजिश

जानकारी तो ये भी मिली है कि दिल्ली धमाके का असल ब्लू प्रिंट तो काजीगुंड की एक अहम मीटिंग के बाद तैयार हुआ था। उसी मीटिंग में उमर ने सभी दूसरे साथियो को साथ लाने का काम किया और उन्हें एक दिशा दिखाई। इस आतंकी ग्रुप का नाम Interim Ansar Ghazwatul Hind रखा गया था। सुरक्षाबलों के मुताबिक भारत में यह संगठन अलकायदा के ही एक साथी के रूप में काम करता है।

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