Assam SIR: असम में वोटर लिस्ट के SIR का ड्राफ्ट जारी होने के बाद चुनाव आयोग लगातार संदिग्ध लोगों को नोटिस भेज रहा है। वहीं, बड़ी संख्या में लोगों के नाम ड्राफ्ट में शामिल भी नहीं है। चुनाव आयोग के नोटिस में कहा गया था कि राज्य में चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया में कई लोगों का नाम मृत्यु के चलते हटा है, जबकि इनमें से कई लोगों ने खुद सामने आकर आपत्ति जताई और यह तक कहा, ‘वे जिंदा हैं।’
चुनाव आयोग के नोटिस पर सरकारी कर्मचारी हाफिजुद्दीन अहमद को स्थानीय सरकारी कार्यालय में सुनवाई के लिए तलब किया गया, जबकि उनका कहना है कि वे सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि सुनवाई उसी दिन निर्धारित थी, इसलिए वह अपने दस्तावेजों के साथ तुरंत कार्यालय पहुंचा।
‘मेरे दस्तावेजों की जांच’
मध्य असम के नागांव कस्बे के हाफिजुद्दीन अहमद ने कहा, “मैंने उन्हें अपना वोटर आईडी कार्ड दिखाया और चूंकि मैं लोक स्वास्थ्य एवं इंजीनियरिंग विभाग का कर्मचारी था, इसलिए मैं वहां के अधिकारियों से परिचित था। उन्होंने मेरे दस्तावेजों की जांच की और कहा कि सब ठीक है।”
बता दें कि वह अकेला नहीं था। दर्जनों अन्य लोगों को भी इसी तरह के नोटिस मिले हैं, जिनमें से कई नोटिस एक ही व्यक्ति द्वारा दायर आपत्तियों पर आधारित हैं। जिसके चलते बरहमपुर, नागांव-बटाद्रबा और राहा, इन तीन निर्वाचन क्षेत्रों में सार्वजनिक सुनवाई स्थगित कर दी गई है। अहमद को नोटिस मिलने से एक रात पहले, उनके पड़ोसी जावेद अख्तर को सुनवाई के लिए दो नोटिस मिले।
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ससुर और पत्नी को भी मिला नोटिस
एक नोटिस उनके 80 वर्षीय ससुर अजिरुद्दीन अहमद के नाम था, जो बिस्तर पर पड़े थे और युवावस्था में एक वरिष्ठ वकील थे। इस नोटिस में भी आपत्ति का कारण “मृत्यु” बताया गया था। दूसरा नोटिस उनकी पत्नी फरहाना यास्मीन के नाम था, जिसमें आपत्ति का कारण “स्थानांतरित” लिखा था।
कुछ इसी तरह ढिंग कॉलेज के 77 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर अब्दुल सलाम अपनी पत्नी के साथ पश्चिम बंगाल की यात्रा पर थे। उनको रविवार को पता चला कि उन दोनों के खिलाफ इस आधार पर आपत्ति दर्ज की गई है कि वे “मृत” हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि हम शहर से बाहर थे, हमने अपने बेटे को सुनवाई के लिए भेजा, लेकिन उसे बताया गया कि हमें दावा एवं आपत्ति प्रक्रिया समाप्त होने से पहले वहां उपस्थित होना चाहिए। इसलिए हम गुरुवार को नागांव पहुंचेंगे और कार्यालय जाएंगे।
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इन सभी लोगों को जारी नोटिस में से पता चला कि आपत्तियां एक ही व्यक्ति द्वारा ही दर्ज की गई है, जिसका नाम बिशाल रॉय है। नागांव-बटादराबा निर्वाचन क्षेत्र के लिए आपत्तियों की सूची की जांच करने पर पाया गया किएक ही व्यक्ति ने एक ही मतदान केंद्र से 64 व्यक्तियों के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) नूरुद्दीन अहमद और उनकी पत्नी भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ आपत्ति का आधार यह है कि वे मृत हैं।
नोटिस पर क्या बोले BLA?
एक बीएलए ने कहा कि बीएलए के तौर पर, मैं नहीं जानता कि यह व्यक्ति कौन है। वह उन राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) में से नहीं है जो मेरे साथ जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। मुझे चुनाव विभाग से केवल एक सूची मिली है जिसमें उन लोगों के नाम हैं जिनके खिलाफ आपत्तियां दर्ज की गई हैं, और शिकायतकर्ता का नाम है।
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दर्ज हुई कई झूठी आपत्तियां
यह तस्वीर जिले के एक मतदान केंद्र की है लेकिन जिले के अन्य मतदान केंद्रों में भी इसी तरह की “बहुमत” और “झूठी” आपत्तियां दर्ज होने पर चिंता जताई गई है। हालांकि यह मुद्दा अल्पसंख्यक समूहों द्वारा उठाया गया है, नागांव के जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा ने कहा कि मुस्लिम बहुल जिले नागांव में हिंदुओं के खिलाफ दर्ज आपत्तियों की संख्या मुसलमानों के खिलाफ दर्ज आपत्तियों से कहीं अधिक है।
सार्वजनिक सूचना में कहा गया कि जिला प्रशासन जनता की मौजूदा चिंताओं से अवगत है और सभी चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है… यह दोहराया जाता है कि किसी भी पात्र मतदाता को बाहर नहीं किया जाएगा या पीछे नहीं छोड़ा जाएगा, और सभी वैध दावों और आपत्तियों का निपटारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
