मुनीष भाटिया

अपने आसपास नजर डालें तो ऐसी वृत्तियां पनपती साफ दिख जाएंगी, जिनमें नैतिक शिक्षा और सदाचार की अपेक्षा भ्रष्ट आचरण हावी होती हैं। अपना काम निकलवाने की खातिर लोग किसी भी हद तक जाने को तत्पर रहते हैं। फिर चाहे शासन तंत्र में बैठे किसी पद से काम निकलवाना हो या फिर किसी क्षेत्र में लालसा के वशीभूत होकर अपना मतलब सिद्ध करना हो, जिसमें प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति बिना किसी जाति, धर्म, लिंग, भेद के समान रूप से भागीदार रहता है।

व्यक्ति की क्षमता और योगदान को महत्त्वपूर्ण मानकर समाज में समानता की भावना को बढ़ावा देना आवश्यक है। नैतिकता, समर्पण, और साझेदारी के साथ काम करना तभी सुनिश्चित हो सकता है जब समृद्धि और समरसता के मामले में सभी की सामाजिक सहभागिता हो। सदाचार मानव समाज में समरसता की दिशा में मार्गदर्शन करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मानवीय संबंधों में समानता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे समृद्ध समाज उन्नत होता है।

यह विडंबना है कि सार्वजनिक मंचों पर व्यक्ति का आचरण समाज में धार्मिक कट्टरवाद का एक बेलगाम लश्कर तैयार किया जाने लगा है। इसका परिणाम हर हाल में नकारात्मक होना है। ऐसी स्थिति में, समाज को नैतिकता और सदाचार की प्राथमिकता देना चाहिए, ताकि समृद्धि और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए सही मार्गदर्शन मिल सके। शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों को समाहित करना और समुचित समर्थन देना अहम है, ताकि समाज में ईमानदारी, साझेदारी, और न्याय मौजूद रह सके।

आज समाज में इस तरह का वातावरण तैयार किया जा रहा है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल भावनाएं भड़काने के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा, ‘गेमिंग ऐप’ के माध्यम से पैसा कमाने के बेमानी होड़ से लेकर बाल कोमल हृदय में घृणा और हिंसा का भाव पैदा किया जा रहा है। इन ऐप के जरिए समाज में आपसी समन्वय और भाईचारे को भी दांव पर लगाया जा रहा है जो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए शुभ नहीं है।

आज समाज में संयम समाप्त हो रहा है। एक टिप्पणी की चिंगारी समाज में हिंसा की आग भड़काने के लिए काफी होती है। छोटे-छोटे कस्बे और गांव भी इंटरनेट की पहुंच से वैमनस्यता का केंद्र बनते जा रहे हैं। आज का बेलगाम मानवीय आचरण समाज में प्रत्येक वर्ग के लोगों के बीच भ्रष्ट वातावरण को उत्पन्न कर रहा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दुहाई दी जाती है, मगर हकीकत यह है कि लोगों की निजता भी सुरक्षित नहीं रही।

भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में लोगों का यह दायित्व बनता है कि खुद की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दूसरे लोगों की स्वतंत्रता का हनन नहीं हो। भारत में आलोचना और विरोध जनतंत्र का आधार है, वहां अन्य धर्मों और जाति के लोगों की आलोचना रचनात्मक सुधार के लिए होना चाहिए, न कि नफरत फैलाने के लिए।

पथभ्रष्ट होने के लिए व्यक्ति का आचरण जितना जिम्मेदार है, उतना ही जिम्मेदार उससे जुड़ा समाज है। समाज से अगर भ्रामक शक्ति को उचित मार्गदर्शन या नियंत्रण मिला होता तो आज तस्वीर कुछ और होती। आज अगर हमें अपने सामाजिक ताने-बाने को बचाना है तो हमें अपने परिवार के युवा व किशोर वर्ग को ऐसा मार्गदर्शन देना होगा, ताकि उनका नैतिक और चारित्रिक उत्थान हो सके। शासन के द्वारा कानून बनाने की अपेक्षा पारिवारिक माहौल इस दिशा में ज्यादा सार्थक परिणाम दे सकता है।

किसी भी काम में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत और प्रतिबद्धता महत्त्वपूर्ण होती है, लेकिन साथ ही दूसरों के साथ सहयोग और समर्थन भी अहम है। सहयोग और मेहनत से अगर सफलता हासिल करनी हो, तो नैतिकता भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अनैतिक तत्त्वों से दूर रहकर सफलता की ऊंचाइयों को हासिल करना सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। चाहे कोई भी क्षेत्र हो, नैतिकता और ईमानदारी से काम करना हमेशा महत्त्वपूर्ण होता है। शासन तंत्र या निजी क्षेत्र, अच्छे नैतिक मूल्यों पर आधारित कार्य न केवल व्यक्ति को सफल बनाता है, बल्कि समाज में भी सुधार लाने में सहायक हो सकता है।

इससे समाज में संतुलन और विश्वास बढ़ता है।लोगों का जागरूक रहना और सतर्क रहना महत्त्वपूर्ण है, ताकि भ्रष्ट आचरण की प्रक्रिया रोकी जा सके और सद्भावपूर्ण वातावरण बना रह सके। नैतिक दिवालियापन समाज में कई समस्याओं का कारण बन सकता है। हमें अच्छे सामाजिक मानकों का पालन करने और एक दूसरे के साथ समर्थन और समझदारी में बढ़ने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हिंसा और असहमति की जगह भाईचारे और समरसता हो। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्त्वपूर्ण है, साथ ही इसे सही रूप से समझाना और उपयोग करना भी जरूरी है।

निजता की सुरक्षा भी महत्त्वपूर्ण है और इसे सावधानीपूर्वक बनाए रखना चाहिए। सही कहा गया है कि व्यक्ति और समाज, दोनों ही पथभ्रष्टता के खिलाफ सामर्थ्यशाली होते हैं। अगर समाज सकारात्मक दिशा में कार्य करे, तो समाज में सुधार हो सकता है। पारिवारिक माहौल में उचित मार्गदर्शन और समर्थन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा की परिस्थितियों में सुधार की दिशा में सामाजिक तंत्र को समृद्ध करने की जरूरत है।

यह समस्या व्यापक है और सही दिशा में परिवर्तन की आवश्यकता है। समाज में नैतिकता और सदाचार के प्रोत्साहन के लिए शिक्षा के क्षेत्र में और भी प्रयास किए जा सकते हैं। साथ ही सामाजिक जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। लोगों को एक दूसरे साथ समझदारी और समर्थन भाव की आवश्यकता है, ताकि समृद्धि और सामंजस्य में सुधार हो सके।