सोमवार सुबह दीनानगर में हुए आतंकी हमले में बुरी तरह जख्मी हुए कार मालिक कमलजीत सिंह मठारू को इलाज के लिए चौहान मेडिसिटी अस्पताल, कोटली में भर्ती कराया गया है। वे हमले के पहले जख्मियों में से एक हैं और तीनों आतंकवादियों को उन्होंने ही सबसे पहले देखा था।

अस्पताल में जनसत्ता से बातचीत में मठारू ने बताया कि सुबह करीब 5.10 बजे जब वह अपने होटल और रेस्तरां के लिए सब्जी खरीदने के लिए अपनी मारुति 800 कार में निकले थे तो सेना की वर्दी पहने तीन लोगों ने उनका रास्ता रोका था। मूंछें रखे हुए वे तीनों क्लीन-शेव थे और कुछ नहीं बोल रहे थे।

उनके शब्दों में, ‘मैं कार उठाने के लिए उस थाने से करीब 250 मीटर दूर मकान से निकला, जहां बाद में आतंकियों ने धावा बोला था। कार दीनानगर के मुख्य बाजार में मेरे आवास से करीब 100 मीटर दूर गैराज में खड़ी थी और सेना की वर्दी पहने तीनों आतंकवादी गैराज के सामने खड़े थे।’

‘जैसे ही मैं कार में बैठा तो उन्होंने मुझे रुकने का इशारा किया। चूंकि वे देखने में बड़े अजीब से लग रहे थे, मैंने तुरंत खतरा भांपा और कार को पीछे मोड़ने का प्रयास किया, पर उन्होंने मेरी कार पर गोलियां बरसा दीं और कार छीन ले जाने से पहले उन्होंने मेरी दोनों कलाइयों और बाएं कंधे पर गोलियां मारीं।’

‘मुझे यह तो याद नहीं कि उन्होंने मुझ पर कितनी गोलियां चलार्इं थीं, पर जिंदगी पर खतरा मंडराते देख पता नहीं कहां से मेरे दिमाग में आया कि मैं मरने का नाटक करने लगा। मैंने सांस रोक ली और अपना सिर स्टीयरिंग पर फेंक दिया और हिलना-जुलना भी बंद कर दिया, हालांकि तब मुझे बड़ा दर्द हो रहा था। जब उन्हें यकीन हो गया कि मैं मर गया हूं तो उन्होंने मुझे कार से नीचे फेंक दिया और वे मेरी कार लेकर भागे।’

उन्होंने बताया, ‘मैंने उठने का प्रयास किया पर मेरी बाजुएं बुरी तरह लटक रहीं थीं और फिर मैं बेहोश हो गया था। किसी ने मेरे बड़े भाई सीएस मठारू को सूचित किया, जो भागकर मौके पर पहुंचे।’

उनके भाई ने बताया, ‘जब मैं वहां पहुंचा तो देखा कि वह खून में लथपथ पड़ा था। पर उसे थोड़ा होश में आते देख मैंने उसे नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया पर उन्होंने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया और बड़े अस्पताल लेकर जाने को कहा।’

अब अस्पताल में उपचाराधीन मठारू की हालत खतरे से बाहर है और आतंकियों की एक गोली उनके कंधे में धंसी है। उनकी पत्नी नीता ने बताया कि उनकी दो अंगुलियां और दोनों बाजुओं के कुछ हिस्से गोलियां लगने से कट गए। मठारू ने बताया, ‘आतंकियों के कार में भाग निकलने के बाद मैंने कई गोलियां चलने की आवाज सुनी और यहां तक कि थाने के सामने एक खंबे से भी कार टकराई थी और उसके बाद वे भागकर थाने में जा घुसे।’