देशभर में कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण आरटी पीसीआर टेस्ट कराने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। इतना ही नहीं बढती भीड़ की वजह से लोगों को टेस्ट रिपोर्ट मिलने में भी देर रही है। आरटी पीसीआर टेस्ट को लेकर डॉ लाल पैथ लैब्स के एमडी अरविंद लाल ने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच के दौरान यह विधि करीब 30 फीसदी मामलों में फेल हो जाती है।

डॉ लाल पैथ लैब्स के एमडी अरविंद लाल ने समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा कि लोगों को आरटी पीसीआर टेस्ट कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण आने के दो से तीन दिन के बाद लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि यह दुनिया भर की परखी हुई जांच विधि तो है लेकिन यह केवल 70 प्रतिशत मामलों में ही संक्रमण का पता लगा पाती है जबकि 30 प्रतिशत मामलों में यह फेल हो जाती है।

इसके अलावा अरविंद लाल ने कहा कि आरटी पीसीआर टेस्ट की प्रमाणिकता कई बातों पर निर्भर करती है। इनमें स्वैब एकत्र करने वाले व्यक्ति, स्वैब का परिवहन, टेस्ट की विधि शामिल होती है। लेकिन हमारे अधिकांश लैब में ठीक ढंग से आरटी पीसीआर टेस्ट किया जा रहा है। बता दें कि पिछले दिनों आईसीएमआर ने भी इस टेस्ट को लेकर गाइडलाइन जारी किए थे और कहा था कि कई स्थितियों में यह टेस्ट जरूरी नहीं है। 

आईसीएमआर के गाइडलाइन के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति रैपिड एंटीजन टेस्ट में संक्रमित पाया गया है, तो उसके आरटी-पीसीआर की जरूरत नहीं होगी। वहीं एक बार आरटी-पीसीआर में पॉजिटिव आने वालों का भी दोबारा टेस्ट नहीं होगा। इसके अलावा 10 दिन तक होम आइसोलेशन में रहने वाले ऐसे लोगों को टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी, जिन्हें लगातार तीन दिन तक बुखार न आया हो। अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए लोगों को भी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी।

भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 3,26,098 नए मामले सामने आए जबकि 3890 लोगों की मौत इस महामारी की वजह से हो गई। संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की कुल संख्या 2 करोड़ 43 लाख से ऊपर हो गई है जबकि अब तक 266207 लोगों की मौत इस महामारी की वजह से हो चुकी है। वहीं पिछले 24 घंटे में 3,53,299 लोग डिस्चार्ज भी किए गए हैं।