दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को भारतीय रेलवे को कड़ी फटकार लगाई। पिछले साल प्रयागराज महाकुंभ के दौरान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ से जुड़े मामले की सुनवाई करते समय कोर्ट ने रेलवे से कहा कि वो उसे हल्के में न ले। कोर्ट नाराज इसलिए हुआ क्योंकि रेलवे ने अब तक अपना लिखित जवाब (हलफनामा) जमा नहीं किया था। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे गंभीर मामले में लापरवाही ठीक नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की बेंच ने अधिकारियों से पूछा कि अधिकारी इतने लापरवाह क्यों हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि क्या वे किसी और हादसे का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने इतनी सख्त टिप्पणी इसलिए की क्योंकि अब तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया था, जबकि इसे 26 मार्च 2025 तक जमा करना था।
पीटीआई की खबर के अनुसार, बेंच ने कहा, “कोर्ट को हल्के में न लें। हमने आपसे एक एफिडेविट फाइल करने को कहा था। आपने क्या किया? जब यह याचिका दायर की गई थी, उस समय दबाव से बचने के लिए, रेलवे की तरफ से देश के सबसे बड़े कानून अधिकारी ने एक बयान दिया था। अब एक साल हो गया है और आप वह एफिडेविट फाइल नहीं कर पाए हैं। इससे क्या पता चलता है? हमें यह पसंद नहीं है।”
PIL की सुनवाई कर रहा था दिल्ली हाई कोर्ट
कोर्ट एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई कर रहा था। यह याचिका ‘अर्थ विधि’ नाम की एक सामाजिक संस्था ने दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि 15 फरवरी 2025 की रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जो दुखद हादसा हुआ, उसमें 18 लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए। याचिका के अनुसार, इस घटना से प्रशासन की बहुत खराब व्यवस्था और नाकामी साफ दिखाई देती है।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के सुझाव के बाद, कोर्ट ने 19 फरवरी 2025 को रेलवे से कहा था कि वह कुछ जरूरी बातों पर विचार करे। इन बातों में यात्रियों की अधिकतम संख्या तय करना, स्टेशनों पर बहुत ज़्यादा भीड़ को रोकना और प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री पर ध्यान देना। कोर्ट ने रेलवे से यह भी कहा था कि वह इन मुद्दों पर अपना फैसला बताने के लिए लिखित जवाब (हलफनामा) दाखिल करे।
रेलवे ने कोर्ट में क्या कहा?
बुधवार को रेलवे अधिकारियों के वकीलों ने कोर्ट से और समय मांगा ताकि वह हलफनामा दाखिल कर सके। रेलवे के वकीलों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि भीड़ संभालने के लिए कई पूरे इंतजाम किए गए हैं, जैसे यात्रियों को रोकने के लिए होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन सभी कदमों की जानकारी देने वाला पूरा हलफनामा जल्द ही कोर्ट में दाखिल किया जाएगा।
वकील ने कहा, “हम माघ मेले के दौरान (इसके उपायों के) सफल इम्प्लीमेंटेशन का इंतजार कर रहे हैं। मेरा एफिडेविट तैयार है। हम बहुत सी चीजें फाइल करना चाहते हैं। हम इसे चार हफ़्तों में फाइल करेंगे।” कोर्ट ने रेलवे को चार हफ्ते का समय दिया और भीड़ कंट्रोल के मुद्दे पर उठाए गए “लेटेस्ट कदमों” की जानकारी देने को कहा। कोर्ट ने टिप्पणी की, “किसी को इन मामलों को ज्यादा गंभीरता से लेना चाहिए। कोर्ट को इस तरह हल्के में न लें।”
