दिल्ली विश्वविद्यालय में फर्जी तरीके के दाखिला दिलाने वाले गिरोह के भंडाफोड़ के बाद पुलिस की गाज अब फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल करने वालों पर गिरेगी। पुलिस को अंदेशा है कि इसके तार खुलेंगे तो कई डिग्रीधारी सफेदपोश और प्रशासनिक अधिकारी भी शिकंजे में आ सकते हैं। इससे पहले गरीबी कोटा में नर्सरी में दाखिले कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश हो चुका है। हालांकि आला सूत्र दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि दिल्ली के अन्य विश्वविद्यालय भी फर्जीवाड़े की चपेट में हो सकते हैं बस नामांकन से जुड़ा एक तिनका सामने आना बांकी है।
दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मंत्री रहते गिरफ्तार करने वाली दिल्ली पुलिस की नजर आम आदमी पार्टी के कई अन्य विधायकों पर भी है, जिनके खिलाफ फर्जी दस्तावेज से डिग्री लेने का आरोप है। पर यह मामला राजनीतिक रंग न ले ले और अदालत के काम में किसी भी तरह की बाधा नहीं पहुंचे इसलिए पुलिस अभी कुछ बोलने से कतरा रही है। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि दरअसल पुलिस कानून के दायरे में काम करती है। हम ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहते जो बेवजह चर्चा और विवाद का मुद्दा बन जाए। हां, यह जरूर है कि जब भी हमारे संज्ञान में या कहीं से शिकायत आएगी तो जांच से हम पीछे भी नहीं हटेंगे। इसी कड़ी में तोमर के मामले की जांच और गरीबी कोटे के बदले अमीर लोगों के बच्चों के नामांकन से जुड़ा शैक्षिक मामला भी है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री नामांकन में जिन सात कालेजों से अपराध शाखा ने डिटेल मांगा है वह तो एक शुरुआत भर है। प्रतिष्ठित हिंदू कालेज, किरोड़ीमल कालेज, अरविंदो कालेज, दयाल सिंह कालेज, रामलाल आनंद कालेज, डीएवी कालेज, भगत सिंह कालेज और कमला नेहरू कालेज तो एक बानगी भर है। देश के कई अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों से डिग्री लेकर फर्जी तरीके से दिल्ली में नामांकन कराने वाले ऐसे गिरोह का भंडाभोड़ बहुत जल्द होगा और तब यह पता चलेगा कि इस प्रकार की डिग्री से अभी तक कितने लोगों ने सरकारी या गैर सरकारी नौकरी हासिल की है। जांच सूत्रों का कहना है कि फर्जी डिग्री से जिसने नौकरी हासिल की है, पहले उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और फिर उनकी नौकरी खुद ब खुद समाप्त हो जाएगी।
नामांकन के तार गहरे हैं और यह कई विश्वविद्यालयों से गुजरते हुए सरकारी महकमे तक पहुंचेगा और फिर जब पूरा मामला खुलेगा तो कई चौंकाने वाली बात सामने आएगी। अपराध शाखा ने अभी बिहार और मध्य प्रदेश के उन विश्वविद्यालय से सूची मांगी है, जिनके सर्टिफिकेट से दिल्ली विश्वविद्यालय में नांमाकन का अंदेशा है। यह सूची भी लंबी हो जाएगी जब इसके फरार सरगना की गिरफ्तारियां होंगी।
इस समय पुलिस की गिरफ्त में सुनील पंवार उर्फ गुरुजी, मोहम्मद जुबेर, रंचित खुराना और प्रवीण झा सीधे तौर पर है। इनसे हिरासत में जिस तरह के खुलासे हो रहे हैं उसका अंदाजा तब लगेगा जब बयान का सत्यापन होगा और अन्य गिरफ्तारी होगी। मालवीयनगर में एक राजनीतिक पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में चर्चित इंद्रजीत काकू की गिरफ्तारी भी कई रहस्य खोल सकते हैं। उसे पकड़ने के लिए पुलिस की कई टीमों ने कई राज्यों में दबिश देनी शुरू कर दी है।
जांच से जुड़े आला सूत्रों का कहना है कि देश के कई विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्री लेकर नौकरी करने वाले गिरोह का पहले भी भंडाफोड़ और गिरफ्तारी हो चुकी है। पर दिल्ली विश्वविद्यालय में इस समय चार साल से नामांकन के फर्जीवाड़े का पता चला है। पूछताछ में अभी आरोपी ज्यादा खुलासे नहीं कर रहे। पर अंदेशा है कि इनसे पहले भी कई लोग इसी तरह से नामांकन कराते होंगे और फिर उसके आधार पर विश्वविद्यालय से निकलने के बाद वे लोग अच्छी नौकरी भी पा लेते होंगे। इसलिए पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और कहीं से भी कोई चूक नहीं दोने दे रही है।
अमलेश राजू
