मुंबई की आर्ट डेको और विक्टोरियन बिल्डिंग को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया है। शनिवार को हुई इस घोषणा के बाद दिल्ली के लोगों के मन में भी यह सवाल उठा होगा कि अब तक दिल्ली को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा क्यों नहीं दिया गया है, जबकि दिल्ली शहर इस मामले में एक वक्त सबसे आगे था? बता दें कि जनवरी, 2014 में दिल्ली ने यूनेस्को से हेरिटेज का दर्जा पाने के लिए मुंबई से भी पहले आवेदन किया था। लेकिन अगले साल दिल्ली ने अपना नॉमिनेशन वापस ले लिया।
गौरतलब बात ये है कि दिल्ली ने जब अपना नॉमिनेशन वापस लिया था, तो उसके कुछ दिन बाद ही जर्मनी में यूनेस्को की हेरिटेज साइट को हरी झंडी देने के लिए फाइनल मीटिंग होने वाली थी। अन्तिम वक्त पर अपना नॉमिनेशन वापस लेने का सरकार की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, जिस कारण दिल्ली की हेरिटेज साइट में जगह बनाने की इच्छा अब तक पूरी नहीं हो पायी है। यूनेस्को में पेश किए गए डोजियर को इनटेक दिल्ली चैप्टर ने तैयार किया था। इस डोजियर में लुटियंस बंगला जोन और मुगल राजधानी शाहजहानाबाद को हेरिटेज साइट घोषित कराने की रिपोर्ट थी। बताया जाता है कि केन्द्र सरकार को डर था कि दिल्ली को हेरिटेज साइट का दर्जा मिल जाने के बाद यहां विकास कार्य कराने में दिक्कत आ सकती है, जिसके चलते सरकार ने आवेदन वापस लेने का फैसला किया।
साल 2016 में टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में केन्द्रीय कल्चर मिनिस्टर महेश शर्मा ने बताया था कि दिल्ली के नॉमिनेशन डोजियर अभी तक संभालकर रखा हुआ है, जब तक मंत्रालय की तरफ से मंजूरी नहीं मिल जाती उसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। बता दें कि यदि दिल्ली को हेरिटेज सिटी का दर्जा मिल जाता है तो इससे दिल्ली में हेरिटेज प्रॉपर्टी के रख-रखाव और उसके संरक्षण में सुधार होगा। इसके अलावा सरकारों और नागरिकों में जागरुकता आएगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद और मुंबई ने दिल्ली के बाद यूनेस्को की हेरिटेज साइट के लिए आवेदन किया था, अब दोनों शहर हेरिटेज साइट का दर्जा पा चुके हैं, लेकिन दिल्ली अभी तक इससे दूर है।
