Delhi Riots के दौरान दंगाइयों की भेंट सामान, दुकान और मकान के साथ इंसान भी चढ़े। यमुनापार में कुछ ने अपनों को हमेशा के लिए खोय दिया, जबकि कुछ भीषण उपद्रव, भगदड़ और हिंसा के दौरान परिवारों से बिछड़ गए। शिव विहार इलाके में बुजुर्ग मोहम्मद अनवर भी राम लीला ग्राउंड के पास से गायब हो गए थे।
अनवर की बेटी गुलशन का दावा है कि उनके पिता को दंगाइयों ने उसी दौरान जिंदा जला डाला था। हालांकि, उनकी लाश की शिनाख्त फिलहाल नहीं हो पाई है, मगर रिश्तेदारों और आस-पास के लोगों द्वारा बताई गई बातों के आधार पर गुलशन का कहना है कि घटना के बाद पिता की लाश भी नहीं बची। सिर्फ एक पैर बचा, जो कि घटनास्थल के आस-पास ही बरामद हुआ। वह इसी अवशेष को हासिल करने कई दिन से मुर्दाघर के चक्कर लगा रही हैं।
दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल स्थित मॉर्चरी में गुलशन और उनके शौहर नसरुद्दीन (नेत्रहीन) ने वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त को इस बारे में बताया। उनका कहना था कि पिता की लाश के लिए वह दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। बकौल गुलशन, “मैं पिता के अवशेष चाहती हूं। फिर चाहे ही मुझे उनकी टांग या फिर अंगुली ही क्यों न मिले।”
पीड़िता के अनुसार, “मेरे पिता शिव विहार के रामलीला ग्राउंड में रहते थे। वह बकरी के बच्चे पालते थे। रेहड़ियां किराए पर देते थे। इन्हीं चीजों से उनका खर्च चलता था, जबकि हम लोग यूपी के हापुड़ में रहते हैं।” देखें, VIDEO:
Anwar was burnt alive in #DelhiRiots, all that remains of his body is a single leg. I met his daughter Gulshan & her husband Nasruddin (who cannot see) at the mortuary, where they’ve been for 6 days. “Even if I get a finger, I want my father’s remains” she told me. A #Mojo Report pic.twitter.com/PQKTjkCkpF
— barkha dutt (@BDUTT) March 2, 2020
अस्पताल के बाहर बैठी पीड़िता ने बताया कि शुरुआत में लाश के लिए दो-तीन तो चक्कर काटने में ही बीत गए थे। अब सैंपल (डीएनए) लिया गया है। डॉक्टर पूछते हैं कि इस बात की क्या पहचान है कि जो यहां है, वह हमारे ही पिता के अवशेष (टांग) हैं?
पीड़िता का आरोप है, “लाश का हिस्सा अस्पताल में मिला है। मुझे लगता है कि यह मेरे पिता के ही अवशेष हैं। जहां पापा रहते थे, वहां आरोपियों ने आग लगाई थी। फिर मेरे पिता को दो गोलियां भी मारी थीं। वह जान बचाकर भागना चाहते थे, पर बच न सके। जिस जगह लकड़ियां रखी जाती थीं, उसी के पास आग में हमारे पिता को जला दिया था।”
पत्रकार को गुलशन ने रिश्तेदार व आस-पास के लोगों के हवाले से बताया, “मौके से कुछ हड्डियां और एक टांग ही थी।” गुलशन के पिता ही घर का खर्च चलाते थे, जबकि उनके पति कुछ साल पहले तेजाब से जख्मी हो गए थे, जिसके बाद से उन्हें दिखाई नहीं देता है।
अनवर के दामाद और बेटी ने बताया- हम चार-पांच दिनों से मुर्दाघर पर हैं। देर रात तक रुकते हैं। आधिकारिक तौर पर हम डॉक्टरों से जवाब का इंतजार कर रहे हैं कि वे बता दें कि यह मेरे पिता के ही अवशेष थे।
