दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में मौजूद फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास 6-7 जनवरी की दरमियानी रात दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती भी हुई। MCD ने तुर्कमान गेट के पास मस्जिद और दरगाह सैयद फैज-ए-इलाही के आसपास के अतिक्रमणों को हटा दिया। एमसीडी की इस कार्रवाई से हिंसा भड़क गई। इलाके के लोगों ने कथित तौर पर पत्थर फेंके और पुलिस ने भी हल्के आंसू गैस के गोले छोड़े। मामले में एक FIR दर्ज की गई है और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह तोड़फोड़ दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा MCD की प्रस्तावित कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने की याचिका खारिज करने के कुछ ही घंटों बाद हुई।

संयोग से फैज-ए-इलाही मस्जिद कुछ हफ्ते पहले भी खबरों में थी। मस्जिद के CCTV कैमरों में 10 नवंबर को लाल किले के बाहर हुए धमाके के मुख्य आरोपी उमर नबी को मस्जिद में 15 मिनट बिताते हुए देखा गया था। इसके बाद वह पार्किंग एरिया में गया, जहां से उसने सफेद हुंडई i20 कार चलाई, जो एक ट्रैफिक सिग्नल पर फट गई। इस घटना में एक दर्जन से ज़्यादा लोग मारे गए थे।

कार्रवाई क्यों हुई?

मई 2025 में सेव इंडिया फाउंडेशन नाम के एक संगठन ने सरकारी अधिकारियों से शिकायत की कि रामलीला मैदान के पास सरकारी जमीन पर एक बड़ी मस्जिद/मरकज़, एक बैंक्वेट हॉल, एक चैरिटेबल डायलिसिस और डायग्नोस्टिक सेंटर, और कई कमर्शियल पैथोलॉजी लैब अवैध रूप से चल रहे हैं। सेव इंडिया फाउंडेशन एक ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर्ड है और इसके संस्थापक प्रीत सिंह हैं। यह संगठन नागरिकों के अधिकारों को लागू करने के लिए मुद्दे उठाने का दावा करता है।

NGO की शिकायत का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत भूमि और विकास कार्यालय (L&DO), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), और MCD के अधिकारियों ने पिछले साल 16 अक्टूबर को साइट पर एक संयुक्त सर्वे किया। सर्वे में दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाए गए सड़क और फुटपाथ पर लगभग 2,512 वर्ग फुट और मस्जिद परिसर से सटे रामलीला मैदान पर 36,248 वर्ग फुट के अतिक्रमण की पुष्टि हुई।

इस जॉइंट सर्वे रिपोर्ट (JSR) के आधार पर सेव इंडिया फाउंडेशन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अधिकारियों को इन अवैध अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश देने की मांग की। 12 नवंबर को दिल्ली HC ने MCD के तहत आने वाली जमीन (यानी, रामलीला मैदान) के संबंध में निर्देश दिया कि सर्वे रिपोर्ट में बताए गए अतिक्रमण को हटाने के साथ-साथ अवैध कमर्शियल एक्टिविटी को हटाने के लिए MCD द्वारा उचित कार्रवाई की जाएगी और इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।

दिल्ली में आधी रात को हटाया गया फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण, उपद्रवियों ने की पत्थरबाजी-5 पुलिसकर्मी घायल

मस्जिद के इंचार्ज अधिकारियों ने जमीन के बारे में क्या कहा है?

मस्जिद और दरगाह सैयद फैज़-ए-इलाही की मैनेजिंग कमेटी ने दावा किया है कि मस्जिद, दरगाह और उस जगह पर एक मुस्लिम कब्रिस्तान सौ साल से भी पहले वक्फ के तौर पर बनाए गए थे। तब से इन संपत्तियों का इस्तेमाल स्थानीय मुस्लिम समुदाय करता आ रहा है। कमेटी के अनुसार समय के साथ कब्रिस्तान का इस्तेमाल बंद हो गया था, लेकिन मस्जिद और दरगाह (जो एक मुस्लिम धर्मगुरु की कब्र या मज़ार है) चालू रहे। कमेटी के अनुसार खुली जमीन ‘वक्फ की ज़मीन’ का हिस्सा है। उसका का इस्तेमाल सामुदायिक गतिविधियों जैसे मुफ्त मेडिकल चेक-अप, राशन बांटने और कभी-कभी शादियों के लिए किया जाता रहा है।

सरकार को अतिक्रमण हटाने के लिए तुरंत कदम क्यों उठाना पड़ा?

नवंबर 2025 में मस्जिद कमेटी को अतिक्रमण हटाने के लिए जारी किए गए निर्देश में PWD ने आसफ अली रोड के अत्यधिक महत्व का ज़िक्र किया। इस पर मस्जिद स्थित है। PWD के नोटिस में कहा गया है कि आसफ अली रोड, जो सेंट्रल दिल्ली में दिल्ली गेट से कमला मार्केट तक जाती है, एक महत्वपूर्ण सड़क है और सेंट्रल दिल्ली के ज़ोन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाती है। नोटिस में कहा गया है कि इस व्यस्त सड़क का इस्तेमाल नियमित रूप से VVIP और VIP आवाजाही के लिए किया जाता है, जिसमें इमरजेंसी काफिले और निर्धारित सुरक्षा मार्ग शामिल हैं। इस सड़क पर कोई भी रुकावट राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा आवाजाही में बाधा डाल सकती है, इमरजेंसी प्रतिक्रिया अभियानों में देरी कर सकती है और शहर की मुख्य गतिशीलता को बाधित कर सकती है।

‘0.195 एकड़’ जमीन का विवाद क्या है?

सर्वे रिपोर्ट और मस्जिद कमेटी की बात सुनने के बाद MCD ने 22 दिसंबर को जारी एक आदेश में कहा कि किसी भी हालत में मस्जिद या दरगाह या कब्रिस्तान का इस्तेमाल शादी के स्थल या क्लिनिक के रूप में नहीं किया जा सकता और यह सरकारी जमीन का सरासर दुरुपयोग था। इसलिए MCD ने कहा 0.195 एकड़ जमीन से ज़्यादा कोई भी ढांचा अतिक्रमण है और उसे हटाया जाना चाहिए। यह 0.195 एकड़ जमीन का ज़िक्र फरवरी 1940 के लीज डीड में किया गया था और यही विवाद की जड़ में है।

हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह इस 0.195 एकड़ क्षेत्र को नहीं छुएगी, लेकिन मस्जिद और कब्रिस्तान दोनों इस जमीन के टुकड़े में शामिल हैं। मस्जिद कमेटी का तर्क है कि कब्रिस्तान इस 0.195 एकड़ के बाहर है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड का क्या तर्क?

मस्जिद दरगाह फैज-ए-इलाही की प्रबंध समिति का गठन दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा किया गया है। 29 अक्टूबर 2025 को वक्फ बोर्ड ने कहा कि साल 2000 से ही इस वक्फ संपत्ति के दुरुपयोग की विभिन्न शिकायतें मिली हैं। बोर्ड के अनुसार 1970 में रामलीला मैदान के पास दो नोटिफाइड वक्फ प्रॉपर्टी थीं। एक ख्वाजा फैज इलाही मस्जिद और दूसरी मस्जिद और कब्रिस्तान फजल महमूद राम लीला ग्राउंड, तुर्कमान गेट।

गजट नोटिफिकेशन के अनुसार ये दोनों प्रॉपर्टी 100 साल से ज़्यादा पुरानी थीं। हालांकि बाद वाली प्रॉपर्टी के बारे में 1970 में यह रिकॉर्ड किया गया था कि मस्जिद को गिरा दिया गया है और उस जगह पर कंपाउंड वॉल के साथ एक मंदिर बनाया गया है। पहली प्रॉपर्टी के संबंध में बोर्ड ने माना है कि गजट नोटिफिकेशन में मस्जिद और कब्रिस्तान के तहत खास इलाकों का ज़िक्र नहीं है। खास माप का रिकॉर्ड न होने से वक्फ के तौर पर नोटिफाइड प्रॉपर्टी की सीमाओं के संबंध में एक अस्पष्ट स्थिति बन गई है। (यह भी पढ़ें- दिल्ली में अतिक्रमण विरोधी अभियान पर भड़के इमरान मसूद)