जेएनयू में हॉस्टल की फीस को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में जेएनयू छात्र संघ ने याचिका दायर की थी, जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (24 जनवरी) को सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) और यूजीसी को नोटिस भेजा है। कोर्ट का कहना है कि जेएनयू के जो छात्र नए शैक्षणिक सत्र में रजिस्टर्ड नहीं हुए हैं, उनसे पुराने हॉस्टल मैन्युअल के आधार पर फीस ली जाए।

कोर्ट ने जारी किया नोटिस: जस्टिस राजीव शकधर की बेंच ने इस मामले में एमएचआरडी और यूजीसी को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह कार्यवाही जेएनयू हॉस्टल की नई फीस को लेकर दायर याचिका पर की। बता दें कि जेएनयू छात्र संघ ने पिछले सप्ताह मंगलवार को हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें आईएचए के फैसले को चुनौती दी गई। साथ ही, आरोप लगाया गया कि अक्टूबर में लिए गए आईएचए के इस फैसले के बारे में छात्र संघ को पहले जानकारी नहीं दी गई थी।

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पुरानी फीस स्ट्रक्चर के हिसाब से रजिस्ट्रेशन की थी मांग: जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष ने इस मामले में याचिका दायर की थी। इसमें कोर्ट से मांग की गई थी कि वह जेएनयू के छात्रों को शीतकालीन सत्र 2020 में पुरानी फीस स्ट्रक्चर के हिसाब से रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दें।

कोर्ट में दी थी चुनौती: जेएनयू छात्र संघ की ओर से अभीक चिमनी और अमन शुक्ला ने याचिका दायर की। इसमें 13 नवंबर 2019 को हुई एग्जिक्यूटिव काउंसिल के मीटिंग मिनट्स और 25 नवंबर 2019 को आईएचए की उच्चस्तरीय कमिटी के फैसले को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया है कि यह फैसला मनमाना और दुर्भावनापूर्ण है, जो जेएनयू के छात्रों पर बुरा असर डालेगा। इससे हॉस्टल मैन्युअल्स में भी काफी बदलाव आ जाएगा।

कुछ इस प्रकार है जेएनयू का फीस: जेएनयू की फीस नियमों के मुताबिक, छात्रों को 1700 रुपए प्रति महीने सर्विस चार्ज देना पड़ता, जिसे वापस ले लिया गया था। वहीं, सिंगल रूम का किराया 20 रुपए से बढ़ाकर 600 रुपए प्रति महीना कर दिया गया था। वहीं, डबल शेयरिंग रूम का किराया 10 रुपए प्रति महीने से बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिमाह किया गया था।