दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शहर के कनॉट प्लेस में देश के पहले ‘स्मॉग टॉवर’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘स्मॉग टावर’ की स्थापना पायलट परियोजना के तहत की गई है, अगर यह सफल रहा, तो दिल्ली के अन्य इलाकों में भी इसकी स्थापना की जाएगी।
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वायु प्रदूषण को कम करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में प्यूरीफाइंग टॉवर या स्मॉग टॉवर लगायी जानी है। जिसके तहत दिल्ली में पहला टॉवर लगाया गया है। केजरीवाल ने कहा कि प्रदूषण से लड़ने और दिल्ली की हवा साफ करने के लिए आज दिल्ली में देश का पहला स्मॉग टॉवर लगाया जा रहा है। इस तकनीक को हमने अमेरिका से आयात किया है। ये टॉवर 24 मीटर ऊंचा है और ये 1 किलोमीटर दायरे की हवा को साफ करेगा। इस अवसर पर उनके साथ दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय भी मौजूद थे।
क्या है स्मॉग टॉवर?: स्मॉग टॉवर एक बड़े आकार का एयर प्यूरीफायर होता है। यह अपने आसपास की गंदी हवा अंदर खींचता है। हवा में से गंदगी सोख लेता है और स्वच्छ हवा बाहर फेंकता है। कुल मिलाकर यह बड़े स्तर पर हवा साफ करने वाली मशीन की तरह है। यह प्रति घंटे कई घन मीटर हवा साफ कर सकता है। और पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे हानिकारक कणों को 75 फीसदी तक साफ करते हवा को शुद्ध करता है।
कैसे करता है काम?: टॉवर में लगे फिल्टर पीएम 2.5 और उससे बड़े प्रदूषण कणों को साफ करने में सक्षम होते हैं। ये टॉवर सौर उर्जा पर भी काम करते हैं। स्मॉग टॉवर का पहला प्रोटोटाइप चीन के बीजिंग शहर में स्थापित किया गया था। इसे बाद में चीन के तियांजिन और क्राको शहर में भी लगाया गया था। दिल्ली में बनाए गए टॉवर से 75 हजार लोगों को स्वच्छ हवा मिलने की उम्मीद है।
