Delhi Gang Rape and Murder Case Convicts Hanging: दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के मामले के चारों दोषियों को शुक्रवार की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गई। पूरे देश की आत्मा को झकझोर देने वाले इस मामले के चारों दोषियों एक साथ तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। देश की आज़ादी के बाद ये ऐसा दूसरा मामला था जहां चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई है। इससे पहले 25 अक्टूबर, 1983 को पुणे के यरवदा केंद्रीय जेल में 10 लोगों की हत्या के मामले में कॉलेज के चार छात्रों को फांसी दी गई थी।

1970 के दशक के मध्य में 10 लोगों की हत्या के मामले में राजेंद्र जाक्कल, दिलीप सुतार, शांताराम जगताप और मुनव्वर शाह नाम के चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई थी। ये सभी कॉलेज के छात्र थे। राजेंद्र, दिलीप और शांताराम शहर के अभिनव काला महाविद्यालय में पढ़ते थे और मुनव्वर एक कॉमर्स कॉलेज का छात्र था। सभी को पुणे के यरवदा केंद्रीय जेल में फांसी दी गई थी।

इन छात्रों ने जोशी परिवार के तीन सदस्यों की उनके विजयनगर कॉलोनी स्थित घर पर और अभ्यंकर परिवार के पांच सदस्यों की भंडारकर रोड पर उनके बंगले पर हत्या कर दी थी। इसके अलावा उन्होंने अलग-अलग घटनाओं में दो आर युवाओं की हत्या भी की थी।

ये हत्याएं जोशी-अभ्यंकर सीरियल मर्डर केस के नाम से काफी समय तक सुर्खियों में रहीं थीं। इन हत्याओं के चलते उस समय पुणे में दहशत का माहौल था। लोग 6 बजे के बाद सड़कों पर नहाईं निकलते थे। सिर्फ पुलिसवालों के सीटी बजाने और गश्त करने वाले जूतों की आवाज़ आती थी।

बता दें दिल्ली गैंग रेप मामले में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर तिहाड़ जेल में चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई। चारों दोषियों ने फांसी से बचने के लिए अपने सभी कानूनी विकल्पों का पूरा इस्तेमाल किया और बृहस्पतिवार की रात तक इस मामले की सुनवाई चली। सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के इस मामले के इन दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीन बार सजा की तामील के लिए तारीखें तय हुईं लेकिन फांसी टलती गई। अंतत: आज सुबह चारों दोषियों को फांसी दे दी गई।