दिल्ली में रविवार को अनाज मंडी में मारे गए 43 लोगों में सात लोग ऐसे थे जिन्हें बहुत मामूली वेतन पर अवैध रूप से रखा गया था। घटना की जांच कर रही पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारियों के मुताबिक आग लगने पर लगभग 20 नाबालिग इमारत के अंदर थे। सात घायल नाबालिगों में से तीन लंचबॉक्स कवर करने और बैग और जैकेट बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रेक्सिन को काटने के लिए दो अलग-अलग कारखानों में काम करने वाले कर्मचारी थे। तीन घायल श्रमिकों में से 15 वर्षीय एक लड़का बोल भी नहीं सकता था।

बहुत ही छोटे और तंग कमरों में रहते थे लड़के :  मीडिया सूत्रों के मुताबिक “तीसरे तल के दो अलग-अलग कारखानों में किशोर श्रमिक काम करते थे। उन्हें हर महीने दो से तीन हजार रुपए दिए जाते थे और वे वहीं रहते थे।” हादसे में घायल सभी सातों श्रमिक बिहार के रहने वाले थे। पुलिस के मुताबिक ये लड़के बहुत ही छोटे और तंग कमरों में रहते थे। इनमें क्षमता से दो गुने लोगों को रखा गया था। इनसे 12 से 16 घंटे काम लिया जाता था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया,”पुलिस के मुताबिक उनसे बड़ों के बराबर काम लिया जाता था, लेकिन उनकी तुलना में वे आधे या उससे भी कम वेतन पाते थे।”

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अस्पताल छोड़कर चला गया एक किशोर : अधिकारी के मुताबिक हादसे में बचे किशोर 10 से 17 वर्ष आयु के हैं। 10 साल के लड़के ने अपने बयान में बताया है कि वह कोई कामगार नहीं था, बल्कि हादसे में मृत एक व्यक्ति का रिश्तेदार था। वह कुछ दिन पहले उससे मिलने आया था। 17 वर्षीय एक लड़का अस्पताल छोड़कर चला गया है। उसे बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया था। पुलिस उसके बयान को दर्ज करने के लिए उसका पता लगाने की कोशिश कर रही है।

रिपोर्ट में पुलिस ने धारा 79 को भी जोड़ा : गुरुवार को जांच टीम ने दर्ज रिपोर्ट में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 को भी जोड़ा। इसके अलावा बचे हुए किशोरों के बयानों पर भी विचार किया गया। इसमें खुलासा किया गया था कि उन्हें काम करने के लिए अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया था। जांचकर्ताओं ने कहा कि 10 साल से कम उम्र के दो बच्चे अपनी मां के साथ पहली मंजिल पर रह रहे थे। दूसरी मंजिल पर आग लगने के बाद मां के जाग जाने से तीनों बच निकलने में सफल रहे। जांचकर्ता के मुताबिक “हमें पता चला है कि आग लगने पर कम से कम चार और नाबालिग इमारत के अंदर थे। वे शायद बच गए होंगे। हम उन्हें पहचानने और उनका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके बयानों से जानने में मदद मिलेगी कि आग कैसे लगी।”