डिफेंस एक्वीजिशन कमेटी (DAC) ने शनिवार को सुरक्षाबलों के लिए 3000 करोड़ रुपए की खरीद प्रक्रिया को अपनी मंजूरी दी है। इस प्रक्रिया के तहत भारतीय नौसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती के लिए दो जंगी जहाज खरीदे जाएंगे, साथ ही भारतीय थल सेना के लिए टैंक अर्जुन के लिए आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल (ARV) खरीदे जाने हैं। डीएसी की इस बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई। बीते अक्टूबर में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCA) की बैठक के दौरान इस रक्षा खरीद पर सहमति बनी थी। अब डीएसी ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है, जिसके बाद जल्द ही रक्षा खरीद की यह प्रक्रिया शुरु हो जाएगी।

बता दें कि भारतीय नौसेना के लिए जिन जंगी जहाजों की खरीद होनी है, उनका निर्माण रुस में किया जाएगा। इन जंगी जहाजों पर ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात की जाएंगी। इस तैनाती के बाद भारतीय नौसेना की ताकत में काफी इजाफा आएगा। चीन जिस तरह से हिंद महासागर में अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है, ऐसे में भारत पर भी नौसेना की ताकत बढ़ाने का दबाव है और ताजा रक्षा खरीद को उसी दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइलें एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसका सेनाओं द्वारा सफल परीक्षण किया जा चुका है। बैठक के दौरान अर्जुन टैंक के लिए एआरवी की भी खरीद की जाएगी। ये एआरवी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) द्वारा डेवलेप किया गया है। जिसका निर्माण सार्वजनिक सेक्टर की कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) द्वारा किया गया है। एआरवी की मदद से लड़ाई के दौरान तेजी से रिकवरी करने और टैंकों को युद्धस्थल पर पहुंचाया जा सकेगा।

चीन और पाकिस्तान की तरफ से बढ़ते खतरे और सुरक्षाबलों को आधुनिक करने के लिए सरकार द्वारा तेजी से खरीद प्रक्रिया की जा रही है। हाल ही में भारत सरकार ने रुस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की भी खरीद की है। साथ ही भारत अपनी वायुसेना को मजबूती देने के लिए फ्रांस के साथ 36 रफाल विमानों की खरीद भी कर रहा है। इंटरनेशनल आर्म्स ट्रांसफर्म की हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत हथियारों का आयात करने वाला नंबर वन देश बन गया है।