साल 2014 में सत्ता से बाहर होने के साथ ही कांग्रेस के नेताओं का दूसरी पार्टियों में जाना बदस्तूर जारी है। वहीं कई नेता अभी भी पार्टी बदलने पर विचार कर रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने नेताओं की गिनती करने को मजबूर होना पड़ा है। बता दें कि पार्टी नेतृत्व ने सभी राज्यों के पदाधिकारियों को पार्टी सांसदों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने निर्देश दिया है कि पिछले तीन लोकसभा चुनावों में जिन नेताओं ने सांसद का चुनाव जीता है और जो नेता साल 2004 से राज्यसभा में रहे हैं, उनके नाम की लिस्ट केन्द्रीय नेतृत्व को भेजी जाए।
बीते कई सालों के दौरान कई कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी बदल ली है। आम नेता ही नहीं बल्कि कई बड़े नेता भी कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस अपने आप को फिर से संगठित करने के उद्देश्य से अपने नेताओं की गिनती करा रही है। कांग्रेस ने नामों की लिस्ट जल्द भेजने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस की इस कार्रवाई की अहमियत को इसी बात से समझा जा सकता है कि पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने तीन अहम बातों के अलावा इस बात को भी आधिकारिक रुप से पार्टी एजेंडे में शामिल किया है। टीओआई की एक खबर के अनुसार, पार्टी के अन्य एजेंडे में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर कार्यक्रमों का आयोजन, पार्टी नेताओं के ट्रेनिंग प्रोग्राम और सदस्यता अभियान शामिल हैं। गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के सभी स्टेट यूनिट और एआईसीसी के अधिकारियों के साथ बैठक की।
माना जा रहा है कि पार्टी नेताओं के नाम आने के बाद पार्टी आगामी चुनावों और पार्टी पदाधिकारियों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट कर सकती है।साल 2014 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस काफी कमजोर हुई है। पार्टी के कई बड़े नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिसके चलते पार्टी का संगठन भी कमजोर हुआ है। पार्टी के कई बड़े नेता इन दिनों भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में भी फंसे हुए हैं। इनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम और डीके शिवकुमार का नाम प्रमुख है।
कांग्रेस के कई बड़े क्षेत्रीय नेता भी कांग्रेस छोड़कर अन्य क्षेत्रीय पार्टियों में शामिल हो चुके हैं। इनमें तेलंगान राष्ट्र समिति (टीआरएस), बीजू जनता दल (बीजद), वाईएसआर कांग्रेस आदि शामिल हैं।
