इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार देर रात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई पोस्ट में कहा, ‘इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है।’
इसके अलावा इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि लापरवाही को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अफसरों के साथ स्थिति की समीक्षा की है और नगर आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
‘इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा’
मुख्यमंत्री ने नगर निगम के अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण इंजीनियर से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए हैं। यादव ने बताया कि उन्होंने नगर निगम में आवश्यक नियुक्तियां तत्काल किए जाने के लिए भी कहा है।
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि उन्हें गंदे पानी के कारण फैले डायरिया के प्रकोप से 10 मरीजों की मौत की जानकारी मिली है।
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विपक्ष के निशाने पर है सरकार
इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मोहन यादव सरकार विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को घेर लिया है। पिछले एक हफ्ते से ज्यादा वक्त से इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में बड़ी संख्या में लोग गंदा पानी पीने की वजह से बीमार पड़े हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस इलाके में 6 महीने के बच्चे सहित 15 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि स्वास्थ्य विभाग ने अब तक चार मौत होने की पुष्टि की है।
पीड़ित परिवारों से माफी मांगे सरकार: उमा भारती
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस मामले में राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पीड़ित परिवारों से माफी मांगने और दोषियों को अधिकतम दंड देने की मांग की है। उन्होंने इस घटना को ‘पाप’ करार दिया और कहा कि इसके लिए राज्य सरकार को ‘घोर प्रायश्चित’ करना होगा।
उमा भारती ने कहा कि यह मुख्यमंत्री मोहन यादव की परीक्षा की घड़ी है।
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