उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सीएए हिंसा से संबंधित सार्वजिनक स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों को हटाने के मूड में नजर नहीं आ रही है। दरअसल, योगी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। योगी सरकार की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुबह 10:30 बजे सुनवाई होगी।
योगी सरकार ने हाई कोर्ट के उस फैसले का भी अनुपाल नहीं किया है जिसमें कहा गया था कि सीएए हिंसा को लेकर लगाए गए लोगों के पोस्टर तत्काल प्रभाव से हटा लिए जाए।
होर्डिंग में करीब 57 लोगों की तस्वीर और उनकी निजी जानकारियां वाला पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए थे। इन लोगों से पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने के चलते हर्जाना वसूलने की बात कही गई थी। कोर्ट का कहना है कि इन लोगों से मुआवजा लेने की बात के इतर इन लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक करना चिंता का विषय है।
इससे पहले मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने लखनऊ के डीएम और आयुक्त को 16 मार्च तक इसकी रिपोर्ट सौंपने को कहा।सीएए का कथित तौर पर विरोध करने और निजी एवं सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपियों के पोस्टर चिपकाने की राज्य सरकार की कार्रवाई से जुड़े इस मामले में पीठ ने रविवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने कहा कि, ‘‘अदालत ने कहा है कि सरकार की यह कार्रवाई (पोस्टर लगाने की) अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है इसलिए पीठ ने लखनऊ के जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को होर्डिंग हटाने का निर्देश दिया है। त्रिपाठी ने बताया कि पीठ ने 16 मार्च को या इससे पहले इस संबंध में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
