संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और एनआरसी विवाद पर महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार द्वंद की स्थिति में है। एक तरफ शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि उन्हें इन दोनों से कोई दिक्कत नहीं है तो वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि वह इसके खिलाफ हैं। ये उनकी (मुख्यमंत्री) राय हो सकती है लेकिन एनसीपी के लिए यह साफ तौर पर चिंता की बात है। हमने सीएए के खिलाफ वोट किया था। एनसीपी प्रमुख ने कहा कि हर चीज के बारे में हमारी (शिवसेना और एनसीपी) एक जैसी राय नहीं हो सकती। हम इसपर उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ चर्चा करेंगे और शिवसेना को मना लेंगे।
ठाकरे ने कहा है कि वह राज्य में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया को नहीं रोकेंगे। ठाकरे ने आश्वासन दिया कि वह एनपीआर के सभी कालम की जांच खुद करेंगे। उन्होंने कहा कि एनपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में महाराष्ट्र में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। सीएए और एनआरसी अलग हैं और एनपीआर अलग है।
ठाकरे एक ट्वीट में कहा ‘अगर एनआरसी लागू होगा तो इससे हिंदू या मुस्लिम ही नहीं आदिवासी भी प्रभावित होंगे। एनपीआर जनगणना है और मुझे नहीं लगता कि इससे कोई प्रभावित होगा क्योंकि यह हर दस साल में होती है।’
एनसीपी ही नहीं कांग्रेस भी सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ है। दोनों ही दलों का कहना है कि इन तीनों के जरिए भारत में रहने वाले अवैध प्रवसासियों को नुकसान पहुंचाना है। इसका इस्तेमाल मुस्लिमो के खिलाफ किया जा रहा है। कांग्रेस ने सीएए को संविधान के खिलाफ बताया है।
कांग्रेस का कहना है कि मुस्लिमों को इससे बाहर रखकर सरकार ने धर्म के आधार पर यह कानून बनाया है। हालांकि मोदी सरकार की तरफ से इन आरोपों का खंडन किया गया है। सरकार ने कहा है कि यह संशोधित कानून सिर्फ प्रताड़ित लोगों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है।
