बुलंदशहर हिंसा में मारे गए पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के ड्राइवर रामाश्रय ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि हिंसा के वक्त मौका-ए-वारदात पर आखिर क्या हुआ था? रामाश्रय ने हिंसक हो उठी उस भीड़ के बारे में बताया जो जान लेने पर उतारू हो गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भीड़ ने पुलिस वालों की हत्या करने के लिए उनकी टीम को चारों तरफ से घेर लिया था।
रामाश्रय ने सुनाई दास्तां
रामाश्रय ने बताया कि पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार बाउंड्री के बाहर घायल होकर गिर गए थे। उनको किसी तरह लाकर गाड़ी में रख गया था, लेकिन उनको लेकर चलने के साथ ही चारों तरफ से भीड़ आ गई और उन्हें घेर लिया। बकौल रामाश्रय, हिंसक भीड़ से आवाजें आने लगीं कि ‘पकड़ लो’, ‘मारो-मारो’। उन्होंने बताया कि हुजूम में शामिल लोग उन्हें गालियां देने लगा था। इंस्पेक्टर सुबोध के ड्राइवर ने कहा, ‘जब सब भागने लगे तो मैं भी कूद कर भाग गया। मैंने पास में ही स्थित गन्ने के खेत में छुपकर किसी तरह अपनी जान बचाई।’ रामाश्रय के मुताबिक, सुबोध कुमार को पहले से ही चोट लगी थी और वह दीवार के पास गिर हुए थे। रामाश्रय और उनके साथी उन्हें उठा कर लाए। उन्हें गाड़ी में डालकर जैसे ही अस्पताल ले जाने की कोशिश की, उग्र भीड़ ने दोबारा से उन पर हमला कर दिया।
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रामाश्रय ने आगे बताया कि उस वक्त गन्ने की खेत की ओर से गोलियां चलाई जा रही थीं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग घायल इंस्पेक्टर सुबोध को गाड़ी में बैठाने में मदद भी कर रहे थे। लेकिन, उसी वक्त कुछ लोगों ने मारो-मारो कह कर पुलिसवालों पर हमला करने लगे। रामाश्रय की मानें तो पेड़ की आड़ से भी पत्थर बरसाए जा रहे थे, लेकिन सुबोध को पहले ही चोट लग चुकी थी। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनके साथ दो और पुलिस वाले थे।
मालूम हो कि बुलंदशहर में गोवंश का मांस मिलने की अफवाह के बाद हिंसा भड़क उठी। भीड़ और पुलिस के बीच झड़प में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह समेत दो लोगों की मौत हो गई। हिंसक घटना में कई पुलिसवाले और अन्य लोग जख्मी भी हुए हैं। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है।


