भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिव सेना के बीच लंबे समय से तनातनी जारी है। तीन दशक तक साथ-साथ चलने के बाद अब दोनों पार्टियां लगभग मन बना चुकी हैं कि 2019 में उनकी सियासी राहें जुदा-जुदा होंगी। इस बात के संकेत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले दिनों दे दिया था, जब उन्होंने महाराष्ट्र में पार्टी नेताओं को अपने दम पर चुनाव की तैयारी करने को कहा। माना जा रहा है कि पार्टी इस साल के आखिर तक होने वाले तीन राज्यों के विधान सभा चुनाव का इंतजार कर रही है। अगर यहां चुनाव परिणाम पार्टी की उम्मीदों के अनुरूप रहे तो एनडीए के सहयोगी दलों के दबाव से भाजपा मुक्त हो सकती है। उधर, एनडीए से शिव सेना के निकलने के बाद अमित शाह ने प्लान बी तैयार कर लिया है। पार्टी तमिलनाडु की सत्ताधारी एआईएडीएमके से नजदीकियां बढ़ा रही हैं।

माना जा रहा है कि वहां की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके के कांग्रेस खेमे में जाने के बाद एआईएडीएमके का पास दूसरे किसी गठबंधन में जाने का विकल्प नहीं बचा है। लिहाजा, पार्टी बीजेपी के साथ जाना पसंद करेगी। बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान एआईएडीएमके ने मोदी सरकार का साथ दिया था। लोकसभा में संख्या बल के लिहाज से देखें तो फिलहाल शिव सेना के जहां 18 सांसद हैं, वहीं एआईएडीएमके के कुल 37 सांसद हैं। राज्यसभा में भी शिव सेना के मात्र तीन सांसद हैं जबकि एआईएडीएमके के 13 सांसद हैं। यानी शिव सेना के हटने और एआईएडीएमके के एनडीए में शामिल होने से एनडीए की ताकत कम नहीं बल्कि और मजबूत होगी। लोकसभा में 19 और राज्यसभा में 10 सीटों की बढ़ोत्तरी होगी। इनके अलावा एनडीए शासित राज्यों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है।

बता दें कि राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए से इस साल आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी टीडीपी और बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की ‘हम’ हट चुकी है। पिछले महीने जम्मू-कश्मीर की सरकार गिरने के बाद पीडीपी भी स्वाभाविक तौर पर एनडीए से जुदा हो चुकी है। शिव सेना लंबे समय से मोदी सरकार और भाजपा का विरोध करती रही है लेकिन अभी भी एनडीए में और केंद्र और राज्य सरकार में शामिल है। इस बीच पिछले साल नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू एनडीए में शामिल हो गई, मगर वो राज्य स्तर तक ही सीमित है। झारखंड में भी सहयोगी आजसू एनडीए से अलग होने पर विचार कर रही है, जबकि यूपी में ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी आए दिन एनडीए के लिए मुश्किलें खड़ी करती रही हैं।