सीबीआई के बड़े अफसरों के बीच चल रहे झगड़े पर बीजेपी सांसद ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए हैं। सुब्रमण्यम स्वामी ने सवाल सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने को लेकर उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वह आश्चर्यचकित हैं कि वर्मा जैसे एक ईमानदार आदमी को सिफ्ट कर दिया गया है। मुझे नहीं पता कि सीबीआई निदेशक के खिलाफ आरोप क्या हैं लेकिन वह एक बहुत ही ईमानदार, सीधा व्यक्ति है। उन्होंने दिल्ली में पुलिस आयुक्त के रूप में अच्छा काम किया और उनकी भागीदारी के बिना पी चिदंबरम पर इस तरह से मुकदमा चलाना संभव नहीं था। स्वामी ने कहा कि वह भ्रष्टाचार की जांच के बारे में चिंतित थे क्योंकि चिदंबरम केस के अंतिम चरण में इसका प्रतिकूल असर हो सकता है।
एक छाप बाहर नहीं जानी चाहिए कि ये लोग स्कॉट फ्री हो जाएंगे, चिदंबरम जैसे आरोपी अदालत में जाएंगे और कहेंगे कि पूरी जांच त्रुटिपूर्ण थी। इसलिए, प्रधान मंत्री को अब यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना है कि चिदंबरम और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच इस कार्रवाई से प्रभावित नहीं है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सीबीआई निदेशक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को बुधवार को छुट्टी पर भेजा था। संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया है।
इस बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच की सुविधा के लिए वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेजने का फैसला एक अंतरिम आदेश था, जांच एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा शुरू की जाएगी। इसके अलावा स्वामी ने मंगलवार 22 अक्टूबर को एक ट्वीट कर सत्ता के ‘गैंग ऑफ फोर’ पर अंगुली उठाई, जो उनके अनुसार जुलाई 2019 से पहले रॉ, सीबीआई, इनकम टैक्स, रिजर्व बैंक और ईडी जैसी प्रमुख एजेंसियों में अपने लोग बैठाना चाहता है ताकि अगर भाजपा को 220 से कम सीटें मिलती हैं तो कांग्रेस से प्रति किसी नरम व्यक्ति को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाया जा सके।

