भारतीय जनता पार्टी द्वारा चुनाव पर किए जाने वाले खर्च में लगातार बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। चुनाव आयोग की ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। भाजपा द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में जब 18वीं लोकसभा और आठ विधानसभाओं के चुनाव हुए थे, तब चुनाव और सामान्य प्रचार पर भाजपा का खर्च 3,335.36 करोड़ रुपये रहा। यह राशि 1,352.92 करोड़ रुपये से लगभग ढाई गुना है, जो कि 2019-20 में 17वीं लोकसभा और सात विधानसभाओं के चुनाव के दौरान खर्च की गई थी।

भाजपा द्वारा 27 दिसंबर, 2025 को चुनाव आयोग को यह रिपोर्ट सौंपी गई जिसे चुनाव आयोग ने इस सप्ताह प्रकाशित किया। इस वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव व्यय पार्टी के कुल व्यय का 88 प्रतिशत (3,774.58 करोड़ रुपये) था।

बीजेपी ने सबसे ज्यादा पैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर खर्च किए

रिपोर्ट में बताया गया है कि बीजेपी ने चुनाव/आम प्रचार पर हुए कुल व्यय में से लगभग 68 प्रतिशत यानी 2,257.05 करोड़ रुपये विज्ञापन और प्रचार पर खर्च किए गए। इसमें से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सबसे अधिक (1,124.96 करोड़ रुपये) खर्च किए गए, इसके बाद विज्ञापन पर 897.42 करोड़ रुपये खर्च हुए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पार्टी ने हवाई जहाज/हेलीकॉप्टर से यात्रा पर 583.08 करोड़ रुपये खर्च किए। पार्टी ने उम्मीदवारों को 312.90 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की।

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पिछले लोकसभा चुनाव चक्र में, भाजपा का चुनावी खर्च 2018-2019 में 792.39 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-2020 में 1,352.92 करोड़ रुपये हो गया था। चुनाव आयोग ने 16 मार्च को 2024 के चुनावों की घोषणा की थी, ऐसे में चुनाव प्रचार वित्तीय वर्ष 2023-2024 में ही शुरू हो गया था। मतदान 19 अप्रैल से 1 जून 2024 तक, यानी 44 दिनों तक चला। चुनाव से पहले के साल यानी 2023-24 में, चुनाव और सामान्य प्रचार पर 1,754.06 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

कांग्रेस ने चुनाव पर खर्च किए इतने रुपये

इस प्रकार, 18वीं लोकसभा और आठ विधानसभाओं के गठन से पहले के दो वर्षों (चुनाव वर्ष और चुनाव पूर्व वर्ष) में कुल व्यय 5,089.42 करोड़ रुपये रहा, जो कि 17वीं लोकसभा और सात विधानसभाओं के गठन से पहले के दो वर्षों (चुनाव वर्ष और चुनाव पूर्व वर्ष) में खर्च की गई कुल राशि 2,145.31 करोड़ रुपये से दोगुने से भी अधिक है।

साल 2019-20 और 2024-25 में विधानसभा चुनाव महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के लिए हुए थे। 2024-25 में इन सात राज्यों के अतिरिक्त जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव हुए। दूसरी ओर, कांग्रेस ने पिछले वर्ष चुनाव आयोग को सौंपी गई अपनी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2025 के चुनावों में भाग लेने पर 896.22 करोड़ रुपये खर्च किए, जो 2023-2024 में खर्च किए गए 619.67 करोड़ रुपये से अधिक है।

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भाजपा की कुल आय 2024-2025 में 6 हजार करोड़ से भी ज्यादा

रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि भाजपा की कुल आय 2024-2025 में 2023-2024 के 4,340.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,769.14 करोड़ रुपये हो गई। पार्टी की अधिकांश आय स्वैच्छिक दान (6,124.85 करोड़ रुपये) से आई, जबकि शेष शुल्क और सदस्यता, बैंकों से ब्याज और अन्य स्रोतों से थी।

हालांकि 2024-2025 वह पहला साल था जब सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की चुनावी बांड योजना को रद्द कर दिया था, फिर भी भाजपा को मिलने वाले चंदे में पिछले वर्ष के 3,967.14 करोड़ रुपये की तुलना में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दिसंबर में चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित भाजपा की चंदा रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2025 में पार्टी को मिले कुल चंदे का 61 प्रतिशत चुनावी ट्रस्टों से प्राप्त हुआ था। पार्टी को 31 मार्च 2025 तक 12,164.14 करोड़ रुपये मिले। रिपोर्ट में दिखाया गया कि वर्ष के अंत में उसके पास 9,996.12 करोड़ रुपये नकद थे, जो पिछले वर्ष के अंत में 7,113.90 करोड़ रुपये से अधिक थे।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, सभी पक्षों को अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के साथ-साथ दान रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होती है, जिसमें 20,000 रुपये से अधिक के सभी दान शामिल होते हैं। ये रिपोर्टें चुनाव आयोग द्वारा अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाती हैं।

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