500 और 1000 के नोट बैन करने के खिलाफ एकजुट विपक्ष ने 28 नवंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। विपक्षी पार्टियां संसद में केंद्र सरकार के इस फैसले का भारी विरोध करते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग कर रही हैं। इसी वजह से संसद का कामकाज बाधित है। शीतकालीन सत्र के सात दिन बीत गए लेकिन संसद में कोई कामकाज नहीं हो सका है। विपक्ष का दावा है कि सरकार के इस फैसले से देशभर के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नोटबंदी के विरोध में करीब-करीब पूरा विपक्ष एकजुट है। इस मुहिम में 14 पार्टियां शामिल हैं, जिसमें कांग्रेस, टीएमसी, जेडीयू, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी, बीएसपी और आरजेडी जैसे दल हैं। करीब 200 सांसदों ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना दिया। इसी मुद्दे को लेकर अब विपक्ष ने 28 नवंबर को आक्रोश दिवस मनाने का एलान किया है। इसके तहत 28 नवंबर को सभी राज्यों में धरने प्रदर्शन होंगे जबकि लेफ्ट पार्टियां पूरे 24 से 30 नवंबर तक प्रदर्शन करेंगी।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर को रात आठ बजे एलान किया था कि 500 और 1000 के नोट उसी रात से प्रचलन से बाहर कर दिए गए हैं। इसके बाद देशभर के लोग अपने-अपने पैसों को बदलवाने के लिए बैंकों में लाइन में खड़े हो गए। पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी आमजनों को कोई राहत नहीं मिल सकी है।
इधर, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के मुद्दे पर नरेन्द्र मोदी सरकार को घेरते हुए राज्यसभा में कहा कि इससे विकास दर दो फीसदी तक गिर सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस फैसले को लागू किया गया है, उससे साफ जाहिर होता है कि मोदी सरकार बुरी तरह से फेल हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से 60 से 65 लोगों की जान चली गई है जबकि आम लोग परेशान हैं लेकिन ये साफ नहीं है इससे फायदे क्या होंगे।
वीडियो देखिए- नोटबंदी पर नरेंद्र मोदी एप्प के सर्वे पर मायावती ने उठाये सवाल, कहा- ईमानदार नतीजों के लिए चुनाव करवाएं
