बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने केंद्र सरकार के शिक्षा सुधार से जुड़े एक अहम बिल पर पेंच फंसा दिया है। काउंसिल ने हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (रिपेल ऑफ यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन) बिल, 2019 पर अपनी असमहति व्यक्त की है।
लाइव लॉ की खबर के अनुसार काउंसिल आरोप है कि बिल का उद्देश्य एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत प्रदत्त बार की शक्तियों को खत्म करना है। सरकार की तरफ से इस बिल को शीतकालीन सत्र में सदन में पेश किए जाने की उम्मीद है।
एडवोकेट्स एक्ट के तहत, विशेष रूप से सेक्शन 6 और 7 के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया को देश मे विधिक शिक्षा के मानक तय करने और उन्हें बढ़ावा देने का अधिकार प्राप्त है। वहीं बिल में बीसीआई की शक्तियों को कम करते हुए विधिक शिक्षा के विनियमन का यह अधिकार प्रस्तावित हायर एजुकेशन कमीशन को दिए जाने की बात कही गई है।
28 सितंबर को काउंसिल ने सर्वसम्मति से एक रेजोल्यूशन पारित कर कहा कि प्रस्तावित बिल बार काउंसिल के अधिकार और स्वतंत्रता पर अतिक्रमण और हमला है। इसमें कहा गया है कि बाहरी लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को लीगल एजुकेशन को रेगुलेट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
अपना विरोध प्रकट करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया अपने 5 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने के लिए भेजेगा। यह प्रतिनिधिमंडल पीएम और केंद्रीय मंत्रियों के समझ बार काउंसिल की प्रस्तावित बिल के संबंध में अपनी चिंताओं को रखेगा। इसमें आगे कहा गया है कि यदि सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आती है तो काउंसिल 21 अक्टूबर को पूरे देश की अदालतों में काम को स्थगित रखेगी।
काउंसिल ने इस संबंध में 30 सिंतबर को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में सुझाव दिया गया है कि प्रस्तावित मसौदा बिल में सेक्शन 1, 2, 26 और 31 का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि ये प्रावधान एडवोकेट्स एक्ट के विपरीत हैं।
