ईरान जल रहा है, देश के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों की सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। ऐसे में देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सामने इन विरोध प्रदर्शनों से निपटना बड़ी चुनौती बन गया है।
लोग खामेनेई की सत्ता को उखाड़ फेंकने और रजा पहलवी के नेतृत्व में राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।
ईरान में 1979 में इस्लामिक क्रांति हुई थी। इस क्रांति का नेतृत्व अयातुल्ला रुहोल्लाह मुसावी खुमैनी ने किया था। इस क्रांति के बाद ईरान में राजशाही खत्म हो गई थी और सत्ता खुमैनी के हाथ में आ गई थी।
ईरान में 1979 में बड़े जन विद्रोह से हुआ था एक शासक का अंत
ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के इशारे पर लोग मुल्क का माहौल खराब कर रहे हैं। ईरान के इस्लामिक शासन ने कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल के आगे कभी नहीं झुकेगा। बड़ी दिलचस्प बात यह है कि ईरान में इस्लामिक शासन की नींव रखने वाले खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसावी का संबंध भारत से था।
मुसावी का जन्म 19वीं शताब्दी की शुरुआत में बाराबंकी के पास किंतूर गांव में हुआ था। किंतूर शिया विद्वानों का केंद्र रहा है।
बाद में सैयद अहमद मुसावी इराक के नजफ चले गए थे और 1834 में ईरान के खोमीन शहर में बस गए। यहीं से उनका परिवार धार्मिक और राजनीतिक सत्ता हासिल करने की दौड़ में शामिल हो गया।
माना जाता है कि मुसावी की वजह से ही खुमैनी धार्मिक और आध्यात्मिक बातों में रुचि लेने लगे। एक सदी के बाद खुमैनी ने ईरान की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया।
अयातुल्ला खुमैनी कौन थे?
अयातुल्ला खुमैनी ईरान की इस्लामिक क्रांति के नेता थे। उन्होंने 1979 में पश्चिमी देशों के समर्थक माने जाने वाले ईरान के पूर्व राजा शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से हटा दिया और ईरान में इस्लामिक शासन की स्थापना की। खुमैनी आगे चलकर ईरान के पहले सुप्रीम लीडर बने। 1989 में खुमैनी की मौत हो गई।
खुमैनी बेहद साधारण ढंग से रहते थे। तेहरान में उनका एक मंजिला घर था। ईरान के सर्वोच्च राजनीतिक और धार्मिक पद पर पहुंचने के बाद भी उनका रहन-सहन बिल्कुल सादा था। यह घर उन्हें सैयद महदी इमाम जमा ने मुफ्त में दिया था लेकिन फिर भी उन्होंने इसके लिए 1000 रियाल दिए थे।
खुमैनी ने अली खामेनेई को अपना उत्तराधिकारी बनाया था।
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