शंकर जालान
जहां बिहार, झारखंड, असम व ओड़िशा में सांप के काटने से मरने वालों की संख्या में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है वहीं, पश्चिम बंगाल में 2014 के बाद से हर साल सांप के काटने से मरने वालों की संख्या में कमी आई है, जिसकी मुख्य वजह लोगों की जागरूकता व बेहतर इलाज को माना जा रहा है। सर्पदंश से मौतों के मामले में पड़ोसी राज्यों की तुलना में बंगाल की स्थिति काफी बेहतर है। पांच साल (2014-2018) के दौरान बंगाल में 5300 से ज्यादा लोगों को सांप ने डंसा और केवल 17 लोगों की मौत हुई। इसी अवधि के दौरान बिहार में 35, झारखंड में 36, असम में 26 व ओडिशा में 43 लोग सर्पदंश से मरे, जबकि इन राज्यों में बंगाल की तुलना में सांप ने कम लोगों को काटा है।
बिहार में 3388, झारखंड में 3763,असम में 2977 व ओडिशा में 4060 लोगों को सांप ने काटा। सूत्र बताते हैं कि बंगाल के विभिन्न जिलों में जागरूकता व सरकारी अस्पतालों में नई तकनीकी और पर्याप्त मात्रा में नई दवाओं के चलन के कारण सर्पदंश से मौत के मामलों में उल्लेखनीय रूप से कमी आई है। जानकारों के मुताबिक राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से सांपों की सही तरीके से पहचान करने और उनके डंसने पर प्राथमिक इलाज के बारे में जागरूकता फैलाने के सकारात्मक नतीजे मिल रहे हैं। लोगों को सांप का रंग-रूप देखकर पहचानने के बारे में बताया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक प्रत्येक सरकारी अस्पताल में सांपों के बारे में दीवारों पर लिखित रूप से विस्तृत जानकारी दी गई है। करैत, कोबरा, चंद्रगोड़ा समेत अन्य विषधर सांपों की जानकारी देने वाली किताबें भी हरेक सरकारी अस्पताल में रखी गई हैं। इतना ही नहीं, जिला स्तर पर लोगों को विषधर सांपों को पहचानने की जानकारी दी जा रही है। नतीजतन जागरूकता बढ़ी है और सही समय पर सही कदम उठाकर जिंदगियां बचाई जा रही हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में हरेक तरह के सांप के विष को निष्क्रिय करने के लिए एंटी-वेनम इंजेक्शन मौजूद हैं। सर्पदंश के शिकार लोगों को अस्पताल ले जाने में देर करने या ओझा के पास ले जाने के कारण ज्यादातर मौतें होती हैं। इस बाबत सूबे की स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने जनसत्ता को बताया कि यह तृणमूल सरकार के सकारात्मक प्रयास और लोगों व चिकित्सकों के बीच सांपों को लेकर बढ़ी जागरूकता का ही नतीजा है।
कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें सांप के काटकर भागते वक्त लोगों ने उसकी तस्वीर मोबाइल फोन में कैद कर ली। सांप की प्रजाति का पता लगते ही चिकित्सक उसके विष के अनुरूप एंटी वेनम इंजेक्शन देकर इलाज में जुट जाते हैं। यानी सांपों की सही पहचान होने पर आसानी से जान बचाई जा सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2018 के दौरान बंगाल में सांपों ने 5,329 लोगों को डंसा है। उनमें से महज 17 लोगों की मौत हुई है। वर्ष 2014 में सांपों ने 1,122 लोगों को काटा था। उनमें से नौ लोगों की मौत हुई थी। 2015 में सांपों ने 996 लोगों को काटा था, जिनमें से सिर्फ दो लोगों की मौत हुई थी। 2016 में सांपों ने 940 लोगों को काटा था, जिनमें से सिर्फ तीन लोगों की जानें गईं। 2017 में सांपों ने 822 लोगों को काटा, जिनमें से दो लोगों की मौत हुई। इसी तरह 2018 में सांपों ने 1,351 लोगों को काटा और चिकित्सकों ने सबकी जानें बचा ली।

