पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल की आत्महत्या पर राजनीतिक रस्साकशी जारी है। बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जब ग्रेवाल के परिवार से मिलने गए तो उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद गुरुवार को राहुल गांधी मृतक के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भिवानी गए। वहीं भाजपा नेता ग्रेवाल की सुसाइड पर सवाल उठा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने ग्रेवाल की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाने के बाद सुसाइड करने वाले पूर्व सैनिकों को कांग्रेसी कह दिया। इस बीच केजरीवाल सरकार ने ग्रेवाल के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे का एलान किया। केजरीवाल सरकार इस मुद्दे पर काफी आक्रामक है। आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोल रही है। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब केजरीवाल सरकार ने इस तरह के मुद्दों को तुरंत लपका हो। इसी साल की शुरुआत में रोहित वेमुला की सुसाइड मामले में भी आप सरकार इसी तरह आक्रामक नजर आई थी।
पूर्व सैनिक के अंतिम संस्कार में शामिल हुए राहुल गांधी व अरविंद केजरीवाल, देखें वीडियो:
केजरीवाल की ओर से रोहित वेमुला के भाई को सरकारी नौकरी चौथे दर्जे की ऑफर की गई थी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केा दलित विरोधी बताते हुए तत्कालीन एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी से इस्तीफा मांगा था। केजरीवाल और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने वेमुला की मां से भी मुलाकात की थी। लेकिन यह मामला कोर्ट चला गया था। बाद में रोहित के भाई ने केजरीवाल सरकार के नौकरी के ऑफर को भी ठुकरा दिया था। इसी तरह से पिछले साल आप की रैली के दौरान आत्महत्या करने वाले राजस्थान किसान गजेंद्र सिंह को लेकर केजरीवाल की काफी किरकिरी हुई थी।
सुसाइड का यह मामला रैली में अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास, मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं के मौजूद रहने के दौरान हुआ। आप सरकार की ओर से 10 लाख रुपये का मुआवजा और किसानों की एक योजना का नाम गजेंद्र के नाम पर रखने की घोषण की गर्इ थी। इसके अलावा गजेंद्र के नाम से मेमोरियल बनाने का एलान भी हुआ था।
गजेंद्र के सुसाइड केस में आप नेताओं पर एफआईआर भी दर्ज की गई थी। गजेंद्र के परिवार ने घटना के लिए केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को जिम्मेदारी ठहराया था। गजेंद्र सिंह की बेटी ने भी आप की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने तो पिता को गंवा दिया अब पैसों से क्या। इन दो मामलों के अलावा भी कई बार केजरीवाल सरकार ने मुआवजा देने में ‘दिलेरी’ दिखाई है।

