उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या कर दी गई। इसका जमकर विरोध हो रहा है और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। अब अरुणाचल प्रदेश के स्पाइडरमैन ने भी एंजेल चकमा के लिए न्याय की मांग की है। स्पाइडरमैन नाम से मशहूर ताकाम टोडो एक पॉपुलर पार्कोर आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने कुछ फिल्मों में स्टंट भी किए हैं। वह ‘अरुणाचल प्रदेश के स्पाइडरमैन’ कहे जाते हैं।
स्पाइडरमैन के नाम से मशहूर ताकाम टोडो
ताकाम टोडो का 2019 में पोस्ट किया गया एक YouTube वीडियो है, जिसमें वह दीवारों, छतों और सड़कों पर कूदते, झूलते, चढ़ते और दौड़ते हुए दिख रहे हैं। इस वीडियो को 25 मिलियन से ज़्यादा व्यूज मिले हैं। ताकाम टोडो त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के लिए न्याय चाहते हैं क्योंकि वह भी कुछ इस तरह के हालात से गुजर चुके हैं।
पुणे में हुआ था ‘स्पाइडरमैन’ पर हमला
ताकाम टोडो के लिए इस घटना ने 14 अगस्त, 2016 की उस रात की यादें ताज़ा कर दीं, जब वह पुणे के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा, “मुझ पर हमला हुआ था। शायद मेरे लुक की वजह से और क्योंकि हमलावरों ने मुझे बाहरी समझा, जिसका कोई लोकल सपोर्ट नहीं था। यहां तक कि पुलिस ने भी शुरू में मेरी बात नहीं सुनी। उस सब से गुज़रने के बाद मैं एंजेल चकमा के लिए न्याय की मांग करता हूं और मैं नॉर्थ-ईस्ट भारतीयों के खिलाफ नफरत भरे अपराधों और भेदभाव के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करता हूं।”
ताकाम टोडो ने आगे कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को देश के दूसरे हिस्सों में सिर्फ इसलिए भेदभाव का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे अलग दिखते हैं। हम भारतीय हैं, चीनी या बाहरी नहीं।” टोडो अपने ऊपर हुए हमले को याद करते हैं जोकि रात के करीब 9 बजे हुए, जब वह 17 साल के दूसरे साल के छात्र थे और सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे थे। उस दौरान वह कॉलेज कैंपस में दोस्तों से बात कर रहे थे।
ताकाम टोडो ने कहा, “थोड़ी दूरी पर कुछ बदमाश शराब पी रहे थे। गलती से मेरी टॉर्च की रोशनी उन पर पड़ गई। पलक झपकते ही वे मुझ पर टूट पड़े। उन्होंने मुझे थप्पड़ मारे और पीटा। बात हाथ से निकल गई और आखिर में उन्होंने मुझे एक बड़े पत्थर से मेरे सिर पर मारा, चिल्लाते हुए कि मैं बाहरी हूं। मेरे कुछ दोस्त सिक्योरिटी गार्ड को बुलाने चले गए जबकि दूसरे यह सोचकर भाग गए कि उन्हें भी पीटा जाएगा। मैं खून से लथपथ और डरा हुआ रह गया था।”
ईटानगर में रहते हैं टोडो
टोडो अब ईटानगर में रहते हैं और वहीं से इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बात की। उन्होंने कहा, “मैं किसी तरह उठा और अंधेरे में, खुद को घसीटते हुए चतुर्शिंगी पुलिस स्टेशन तक ले गया। लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की क्योंकि मैं हमलावरों की पहचान नहीं कर पाया था।” पुलिस ने छह दिन बाद 20 अगस्त को अज्ञात हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज की। तब तक पुणे की नॉर्थ ईस्ट कम्युनिटी के सदस्य भी टोडो के सपोर्ट में आ गए थे।
पुलिस ने आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जांच शुरू की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इस घटना के बाद तत्कालीन पुणे पुलिस प्रमुख रश्मि शुक्ला ने भी माना कि उन्हें बहुत बुरा लगा और उन्होंने शहर में बसे नॉर्थ ईस्ट के लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को देखने का आश्वासन दिया। टोडो कहते हैं, “मैंने बाद में कुछ बार पुलिस से संपर्क किया। लेकिन कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ, कुछ नहीं। मैं मार्च 2020 में अरुणाचल प्रदेश चला गया और अपना B.Tech पूरा किया।”
कैसे मशहूर हुए टोडो?
ताकाम टोडो के अनुसार वह उस हमले में सिर्फ फ्री रनिंग पार्कोर से मिली ताकत की वजह से बच पाए। वह कहते हैं, “मुझे 2013 के आसपास पार्कोर में दिलचस्पी हुई। विद्युत जामवाल की कमांडो, टाइगर श्रॉफ की हीरोपंती जैसी फिल्में और टोनी जा (थाई मार्शल आर्टिस्ट और एक्टर) के वीडियो देखने के बाद मुझे अच्छा लगा। मैंने वीडियो और CD देखकर खुद ही यह खेल सीखा। फिर मैंने पुणे में स्पाइडरमैन बनकर पार्कोर और फ्रीरनिंग की और बाद में अरुणाचल प्रदेश और दूसरी जगहों पर भी की।” अब टोडो सरकारी नौकरी पाने के लिए कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी भी कर रहे हैं। उनका “पुणे (भारत) में स्पाइडरमैन जंपिंग” वीडियो है, जिसने उन्हें 2019 में 25 मिलियन व्यूज़ दिलाए। पढ़ें पूर्वोत्तर के छात्रों ने देहरादून में निकाला कैंडल मार्च
