जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्ज वापस लिए जाने के बाद केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर प्रशासन लगातार इस बात के जिद पर अड़ी रही है कि कश्मीर में हालात सामान्य है। आर्टिकल 370 हटने के दो महीने से ज्यादा दिन का समय बीत चुका है और सरकार ने अब यह बात स्वीकार की है कि कश्मीर में यातायात और दुकानें बंद है और हालात सामान्य नहीं है। शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के 10 स्थानीय अखबारों में सरकार ने विज्ञापन देकर यह बात मानी है कि कश्मीर में सबकुछ बेहाल है और ट्रांसपोर्ट ठप है।इस विज्ञापन में सरकार ने सवाल उठाए हैं कि अगर इस तरह दुकानें बंद रहेंगी और यातायात ठप रहेगा तो इसमें किसका फायदा होगा?
विज्ञापन में लिखा है कि कश्मीर के लोगों को पिछले 70 साल से अधर में रखा गया था। उन्हें आतंक गरीबी और हिंसा के कभी ना खत्म होने वाल चक्र में रखा गया था। कश्मीर के लोग पिछले सत्तर साल से प्रोपगेंडा का शिकार रहे हैं। विज्ञापन में कहा गया अलगाववादियों को दोषी ठहराते हुए लिखा गया है कि अलगाववादी हिंसा, पथराव और उत्पीड़न में आम लोगों के बच्चों को धकेल रहे हैं। आज, आतंकवादी धमकी और जबरदस्ती की समान रणनीति का इस्तेमाल करते हुए कश्मीर की शांति को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को लेकर संदेश भेजने के लिए आधिकारिक विज्ञापनों का उपयोग कर रही है। पिछले महीने भी सरकार ने दर्जनों स्थानीय अखबारों में आर्टिकल 370 और 35ए के प्रावधानों को खत्म करने के फायदों के बारे में सूचित करने के लिए पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित कराया था।
