प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लिया जाना अपेक्षित था। शपथ ग्रहण के वरीयता क्रम के लिहाज से वह मोदी मंत्रिमंडल के शीर्ष चार में शामिल हैं। प्रधानमंत्री के बाद राजनाथ सिंह ने दूसरे और शाह ने तीसरे नंबर पर शपथ ली। कुल 24 कैबिनेट मंत्रियों में पूर्व विदेश सचिव डॉ. एस जयशंकर को शपथ दिलाई गई। उनका नाम अपेक्षित नहीं था और ऐन शपथ ग्रहण के समय सामने आया। मोदी मंत्रिमंडल के संभावित नामों में जयशंकर के बारे में चर्चा तक नहीं थी।
शतरंज खेलने, क्रिकेट देखने व संगीत में गहरी रुचि रखने वाले भाजपा के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले अमित शाह ने राज्य दर राज्य भाजपा की सफलता की गाथा लिखते हुए इस बार लोकसभा में पार्टी के सदस्यों की संख्या 303 करने में महती भूमिका निभाई। चुनाव के दौरान शाह ने न केवल राजग के घटक दलों के साथ गठबंधन को लेकर लचीला रुख अपनाया बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रतिद्वंद्वी दलों के वोट बैंक को अपनी पार्टी के पाले में लाने की सफल रणनीति बनाई। भाजपा की जीत के साथ ही किसी गैर कांग्रेसी सरकार को लगातार दूसरी बार केंद्र की सत्ता में लाने के प्रमुख सूत्रधार शाह ने बूथ से लेकर चुनाव मैदान तक प्रबंधन और प्रचार की ऐसी सधी हुई बिसात बिछाई कि मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी भी मात खा गए।
भारत सरकार के पूर्व विदेश सचिव डॉ. एस जयशंकर को मोदी सरकार की कैबिनेट में जगह मिली है। इनका पूरा नाम सुब्रह्मण्यम जयशंकर है। जयशंकर अपने करिअर में अमेरिका, चीन समेत आसियान के विभिन्न देशों के साथ कई कूटनीतिक वार्ताओं की अगुआई कर चुके हैं। उन्हें मोदी के करीबी और चीन विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। चीन के साथ 73 दिन तक चले डोकलाम विवाद को सुलझाने में भी जयशंकर का अहम रोल बताया जाता है। इससे पहले 2010 में चीन द्वारा जम्मू कश्मीर के लोगों को स्टेपल वीजा दिया जाता था। इस नीति को बदलवाने में भी जयशंकर की अहम भूमिका रही। जयशंकर 1977 बैच के आइएफएस अधिकारी हैं। भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते में भी उनकी अहम भूमिका रही है। जयशंकर उन राजनयिकों में से हैं, जिन्हें चीन, अमेरिका और रूस तीनों ही मुल्कों में काम करने का अनुभव है।
वह जाने-पहचाने इतिहासकार संजय सुब्रह्मण्यम और भारत के पूर्व ग्रामीण विकास सचिव एस विजय कुमार के भाई हैं। परिवार में उनकी पत्नी क्योको और तीन बच्चे हैं। फिलहाल जयशंकर टाटा समूह के वैश्विक कॉरपोरेट मामलों के प्रमुख हैं। जयशंकर और मोदी की जान-पहचान उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले से है। 2012 में जब मोदी गुजरात सीएम के रूप में चीन के दौरे पर थे, उसी दौरान जयशंकर उनसे मिले थे। कहा जाता है कि मनमोहन सिंह 2013 में ही उन्हें विदेश सचिव बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सुजाता सिंह को चुना। हालांकि, फिर मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद सुजाता के बाद जयशंकर को ही उस पद के लिए चुना। एस जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे।
