अगस्तावेस्टलैंड वीवीआइपी हेलिकॉप्टर सौदा घोटाला मामले में भारतीय जांच एजंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। लगभग 3727 करोड़ रुपए के इस सौदे में बिचौलिया रहे ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन माइकल को भारत प्रत्यर्पित करने का रास्ता साफ हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच प्रत्यर्पण समझौते के तहत माइकल को प्रत्यर्पित किया जा सकता है। 54 साल का माइकल फिलहाल दुबई की जेल में बंद है। दुबई की अपीलीय अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा और माइकल के वकील की याचिका निरस्त कर दी। निचली अदालत ने कहा था कि माइकल का प्रत्यर्पण किया जा सकता है। अदालत ने भारत को प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ माइकल की याचिका खारिज कर दी है। अब उसके पास वहां के मंत्रालय से अनुरोध करने के अलावा कोई रास्ता बचा नहीं है। खलीज टाइम्स के मुताबिक, पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश अब्दुलअजीज अल जरूनी ने अन्य सदस्य न्यायाधीशों मुसाबेह थालोब, मुस्तफा अल शिनवी, महमूद सुल्तान और अन्य न्यायाधीशों की उपस्थिति में फैसला सुनाया।

अब भारतीय जांच एजंसियां माइकल से पूछताछ कर सकेंगी। पूछताछ में माइकल उन नामों का खुलासा कर सकता है, जिन्हें 3727 करोड़ रुपए के सौदे को परवान चढ़ाने के लिए कथित रूप से घूस दी गई। संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा एजंसियों ने फरवरी 2017 में माइकल को गिरफ्तार किया और इसके बाद से उसके प्रत्यर्पण की कोशिशें चल रही थीं। माइकल को भारत प्रत्यर्पित कराने के लिए भारतीय एजंसियों- सीबीआइ व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यूएई का कई बार दौरा किया। इस दौरान एजंसियों ने यूएई के अधिकारियों और अदालत के साथ घोटाले से जुड़े आरोपपत्र, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य एवं दस्तावेज साझा किए।

आरोप है कि इस सौदे के लिए एंग्लो-इटैलियन कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड ने भारतीय राजनीतिज्ञों, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, नौकरशाहों, भारतीय वायुसेना के तत्कालीन प्रमुख एसपी त्यागी समेत वायु सेना के अन्य अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए माइकल को कथित रूप से करीब 350 करोड़ रुपए दिए। इस करार के जरिए अगस्ता वेस्टलैंड को वीवीआइपी लोगों के लिए 12 हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति करनी थी।