दत्तक माता-पिता के इंतजार में बढ़ रही बच्चों की उम्र उन्हें गोद लेने की प्रक्रिया से वंचित कर रहा है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के पास गोद लेने के लिए मौजूद ऐसे हजारों बच्चे हैं, जिनकी उम्र छह वर्ष या इससे अधिक हो गई है। इन्हें कोई भी दत्तक माता-पिता गोद लेने के लिए तैयार नहीं हैं। यह बच्चे उक्त माता-पिता की पसंद के दायरे से बाहर हो जाते हैं।
कारा के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में अप्रैल से जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक करीब 3343 बच्चों को गोद दिया गया। कारा के आंकड़ों के अनुसार देशभर से मौजूदा समय में करीब 33 हजार दत्तक माता-पिता बच्चों को गोद लेने के लिए कतार में हैं। इनमें से केवल दस से 15 फीसद माता-पिता को ही उनकी पसंद के अनुसार बच्चे मिल पाते हैं। जबकि 85 से 90 फीसद माता-पिता को निराशा ही हाथ लगती है। कारा के विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश इच्छुक माता-पिता गोद लेने के दौरान कई तरह की शर्तें रखते हैं। इनमें बच्चे की कम उम्र, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, रंग-रूप और कभी-कभी लिंग जैसी अपेक्षाएं भी शामिल होती हैं।
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आमतौर पर दंपति शून्य से दो या अधिकतम पांच वर्ष तक के बच्चों को गोद लेना पसंद करते हैं। जैसे-जैसे बच्चा छह साल की उम्र पार करता है, उसके गोद लिए जाने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर दत्तक माता-पिता शिकायत करते हैं कि ऐसे बच्चे उनके परिवार में घुल मिल नहीं पाते। छह साल के बाद बच्चे अपने आसपास के माहौल, लोगों और अनुभवों को समझने लगते हैं। ऐसे में नए माता-पिता और नए परिवेश के साथ तालमेल बिठाने में समय लग सकता है। यहीं कारण है कि गोद लेने के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची होने के बावजूद बड़ी उम्र के बच्चों को परिवार नहीं मिल पाता।
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अधिकारियों का कहना है कि माता-पिता अपनी पसंद और अपेक्षाओं में लचीलापन नहीं दिखाते। नतीजतन, एक तरफ माता-पिता वर्षों तक प्रतीक्षा करते रहते हैं और दूसरी तरफ बच्चे बाल गृहों में ही अपना बचपन गुजारने को मजबूर हो जाते हैं।
बच्चों को मिलती है हर संभव मदद
कारा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना सक्सेना का कहना है कि जिन बच्चों को दत्तक माता-पिता गोद नहीं ले पाते उन्हें मंत्रालय के तरफ से हर संभव सहयोग मिलता है। गोद लेने के लिए उपलब्ध ऐसे बच्चों को 18 साल की उम्र तक सरकारी संस्थान में रखा जाता है। उसके पश्चात इनको 21 साल की उम्र तक बाद की देखभाल सहायता प्रदान की जाती है। वहीं अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि यही सही परामर्श, धैर्य और प्रेम के साथ बड़े बच्चों को भी सफलतापूर्वक परिवार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
बड़ी उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से अधिक समझदार होते हैं और परिवार के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। लोगों को यह समझाना आवश्यक है कि माता-पिता बनना केवल नवजात या छोटे बच्चे तक सीमित नहीं है। हर बच्चे को, चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो, परिवार, सुरक्षा और प्रेम का अधिकार है।
