दिल्ली की तीस हजारी अदालत में वकीलों और पुलिसर्किमयों के बीच हुए टकराव के संबंध में दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इस घटना में कम से कम 20 सुरक्षाकर्मी और कई वकील घायल हुए। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक तथ्यात्मक रिपोर्ट है, जिसमें दिल्ली पुलिस ने शनिवार की घटना की परिस्थितियों और उसके बाद की गई कार्रवाई का विवरण दिया है।
गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय के बाहर सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है। प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से स्पेशल पुलिस कमिश्नर ने अपील की कि वह प्रदर्शन खत्म करें और अपनी-अपनी ड्यूटी पर वापस लौट जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह लिखित आश्वासन के बाद ही प्रदर्शन खत्म करेंगे। पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद भी प्रदर्शनकारी नहीं मान रहे हैं।
इस मुद्दे पर आज तक न्यूज चैनल के लाइव डिबेट कार्यक्रम ‘दंगल’ में एंकर रोहित सरदाना ने पैनल में शामिल बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट में वकील गौरव भाटिया से स्टूडियो में काला कोट न पहनने को लेकर सवाल जवाब किए। इस दौरान उन्होंने पूछा कि आप काला कोट क्यो नहीं पहनकर आए? क्या आपको काला कोट पहनने से घबराहट हो रही है? बीजेपी नेता ने भी इसका जवाब दिया।
दरअसल डिबेट की शुरुआत में एंकर पैनल में शामिल अन्य वकील विष्णु जैन के काले कोट पहनने का जिक्र करत हैं लेकिन बीजेपी नेता गौरव भाटिया के काला कोट न पहनने पर सीधा सवाल दाग देते हैं। वह पूछते हैं क्या आपको काला कोट पहनने से घबराहट हो रही है?
रोहित सरदाना के इस सवाल पर बीजेपी नेता कहते हैं ‘काला कोट हमारी पहचान है और हमें इसपर गर्व है। हमारे अंदर कानून बनाए रखने की भावना होती है और हमारी जिम्मेदारी किसी भी और नागरिक से कहीं ज्यादा है। लेकिन क्या यह कहीं से भी सही है कि कोर्ट परिसर में कोई पुलिसकर्मी एक निहत्थे वकील पर गोली चलाए और वह क्रिटिकल होकर आईसीयू में भर्ती हो। मैं समझता हूं कि यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। दूसरी बात जिस तरह से वहां पर वकीलों पर लाठी चार्ज किया गया वह भी गलत था। अगर हम जनता को इंसाफ दिलाते हैं तो पुलिस की भी यह जिम्मेदारी है कि वह कानून व्यवस्था को बनाए रखें।’
गौरव भाटिया के इस जवाब पर एंकर पलटवार करते हुए कहते हैं ‘अगर ऐसा है तो वे लोग कौन है जो पुलिसवालों को पीट रहे हैं। वे लोग कौन हैं जो इस पूरे घटनाक्रम को कवर कर रहे पत्रकारों को मार रहे हैं? बीजेपी नेता इस पर कहते हैं ‘हम इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट गए और उन्हों यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए।
इस पूरे मामले में हम लड़ाई लड़ेगे और जीत हमारी ही होगी। हमें इसपर पूरा भरोसा है। लेकिन प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों की मांग बिल्कुल भी सही नहीं है। वे कह रहे हैं कि सभी स्तर के जजों की पुलिस सुरक्षा वापस ली जानी चाहिए। क्या ये कोई जायज मांग है? उनकी मांग है कि अदालतों से पूर्णत: पुलिस सुरक्षा हटाई जाए। मेरा मानना है कि ये मांगें कहीं से भी उचित नहीं है। देखिए डिबेट में आगे क्या हुआ:-
