हालत यह है कि कई जगहों पर नदियों का पानी पीने ही नहीं बल्कि स्रान के योग्य भी नहीं रह गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने नदियों में पानी के प्रदूषण स्तर की रिपोर्ट तैयार की। इसके मुताबिक, देश की 279 नदियों के 311 खंडों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से अधिक खराब पाया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने संसद में दी अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

रिपोर्ट बताती है कि सीपीसीबी द्वारा पानी के प्रदूषण स्तर की निगरानी की जाती है। केंद्र व राज्यस्तरीय जांच एजंसियों के माध्यम से 4484 स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी की जाती है। इस जांच में वर्ष 2022, 2021 व 2019 में 603 नदियों की जल गुणवत्ता का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के सभी राज्यों में अधिक प्रदूषण वाली जगहों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार की नदियां शामिल हैं।

यह रिपोर्ट लोकसभा में सोमवार को उपलब्ध कराई गई है। इस रिपोर्ट में नदियों को विभिन्न प्राथमिकताओं के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा है और देश के केंद्रशासित प्रदेशों समेत तीस राज्य इनमें शामिल है। इन तीस राज्यों में एक भी ऐसा राज्य नहीं है जिसमें सभी जगहों पर गुजरने वाली नदियां साफ हों। देश के 11 राज्य ऐसे हैं, जहां बहुत अधिक जगहों पर नदियों में प्रदूषण पाया गया है।

इन राज्यों में असम, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु ओर पश्चिम बंगाल शामिल हैं। सभी राज्यों को मंत्रालय ने नदियों के पानी में प्रदूषण के आधार पर वर्गीकृत किया है। रिपोर्ट में केंद्र सरकार ने दावा किया है कि नदियां और झीलों की सफाई एक सतत प्रक्रिया है। यह राज्य व संघ राज्य क्षेत्रों की जिम्मेदारी है। इसके तहत राज्यों को यह सुनिश्चित करना होता है कि दूषित जल नदियों में नहीं छोड़ा जाए ताकि नदियों के प्रदूषण स्तर को कम किया जा सके।

सरकार के मुताबिक नदियों के संरक्षण के लिए नमामि गंगे की केंद्रीय क्षेत्र की योजना और अन्य नदियों के लिए पुनरुद्धार योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। ताकि नदियों के क्षेत्र में अधिक से अधिक काम किया जा सके। पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देश में नदियों के साथ आद्रभूमियों के संरक्षण पर भी काम कर रहा है। इसके तहत केंद्र व राज्य सरकार के साझा प्रयासों से झील व नदी क्षेत्रों को सूखने से बचाने की पहल की जा रही है। इसके तहत नदियों व झीलों की खुदाई, बरसाती पानी का प्रबंधन, मलबा कचरा आदि हटाना और क्षेत्र का सौंदर्यीकरण करना शामिल है।