Swami Ramdev Constipation Tips: घंटों एक ही जगह पर बैठ कर काम करने, बाहर से कुछ भी अनहेल्दी खाने और तनाव का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। इससे पेट में गैस, कब्ज की समस्याएं होने लगती हैं। युवा से लेकर बुजुर्ग सभी उम्र के लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में अगर आप भी गैस बनने या कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं तो आपको योग की तरफ रुख करना चाहिए।

योग गुरु बाबा रामदेव ने कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बताया है जिसकी मदद से आप पेट में गैस बनने या कब्ज की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। योग न सिर्फ आपके शरीर को लचीला बनाता है बल्कि यह आंतरिक अंगों को भी सक्रिय करता है। इससे पेट की दिक्कतों को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। आइए जानें इनके नाम और योग करने का सही तरीका।

सेतुबंध आसन

योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार पेट में गैस बनने और कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए आप सेतुबंध आसन कर सकते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले आपको पीठ के बल लेटना होगा। इसके बाद हाथों को बगल में रखना है। फिर धीरे-धीरे पैरों को घुटनों से मोड़कर हिप्स के पास लेकर जाना है। अब आपको करना यह है कि हिप्स को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ उठाना है। अब कुछ देर के लिए इस स्थिति में सांस को रोककर रखें और फिर सांस छोड़ते हुए वापस दोबारा पहले वाली अवस्था में आ जाना है।

उत्तानपादासन

जिन लोगों को अक्सर गैस बनती है या कब्ज की शिकायत रहती है तो उनको उत्तानपादासन करना चाहिए। इसे करने के लिए मेट या चटाई बिछाकर जमीन पर पीठ के बल आराम से लेट जाएं। फिर अपने दोनों पैरों को सीधा करें। अब शरीर को ढीला छोड़ दें। फिर अपनी हथेलियों को जमीन पर रखें। धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। इसके बाद सांस रोकें। जितना हो सके इस स्थिति में रुकने की कोशिश करें। फिर सांस को छोड़ते हुए धीरे-धीरे पैरों को नीचे की ओर लेकर आएं।

नौकासन

नौकासन के जरिए भी आप गैस और कब्ज की समस्या को दूर कर सकते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई या योगा मेट बिछाकर आराम से पीठ के बल लेट जाएं। अपने पैरों को सीधा रखें। फिर हाथों को शरीर के बगल में रखें। अब गहरी सांस लें। इसके बाद सांस को छोड़ते हुए छाती और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं।

फिर बाहों को पैरों की ओर खींचने की कोशिश करें। इस दौरान ध्यान रहें कि आंखें, उंगलियों और पैर की उंगलियां एक लाइन में होनी चाहिए। इस समय आपको अपने पेट की मांसपेशियों के सिकुड़न पर नाभि क्षेत्र में तनाव महसूस होगा। जितना संभव हो इस मुद्रा में रहें। इस दौरान आराम से गहरी सांस लेते रहें। फिर कुछ देर इसी स्थिति में रहें। इसके बाद पहली वाली अवस्था में आ जाएं।

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Disclaimer: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।