उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी एक तरीके से सीएम योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि पिछले चुनाव में ऐसा नहीं था। 2017 में बीजेपी के पास सूबे में कोई बड़ा कोई चेहरा नहीं था। ऐसे में पीएम मोदी की लोकप्रियता के सहारे पार्टी अखाड़े में उतरी थी और 300 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई थी। यूपी में बहुमत मिलने के बाद सीएम पद के लिए कई नेताओं के नाम सामने आए थे।
ज्योतिष ने क्या की थी भविष्यवाणी: एक ऐसा ही नाम था मनोज सिन्हा का। उस दौरान मनोज सिन्हा अपने ज्योतिष की एक भविष्यवाणी से नाराज़ भी हो गए थे। तब मनोज सिन्हा गाजीपुर से सांसद थे और अपनी शांत छवि के लिए पहचाने जाते थे। सियासी गलियारों में तेजी से मनोज सिन्हा का नाम आगे आया। अपने नाम का ऐलान होने से पहले सिन्हा वाराणसी पहुंच गए थे। ‘द लल्लनटॉप’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां पहुंचने के साथ ही सिन्हा को अपने सीएम बनने का पूरा विश्वास था।
मनोज सिन्हा ने यहां अपने पुराने ज्योतिष को फोन लगाया और जानना चाहा कि आगे क्या समीकरण बन सकते हैं। ज्योतिष ने थोड़ा समय मांगा। थोड़ी देर बाद फोन बजता है और मनोज सिन्हा को दूसरी तरफ से आवाज़ आती है- साहब, अभी कुछ लग नहीं रहा है। मनोज सिन्हा इस बात से काफी नाराज़ हो गए और गुस्से में फोन रख दिया था। बाद में ज्योतिष की बात सच साबित हुई और यूपी सीएम की गद्दी पर बैठे थे योगी आदित्यनाथ।
पार्टी सर्वे के बाद कटा था पत्ता: बीजेपी ने न्यूज़ चैनल्स से अलग यूपी में एक सर्वे करवाया था। इस सर्वे के आधार पर ही पार्टी आगे की रणनीति और सीएम का चयन करने वाली थी। सर्वे में सबसे आगे योगी आदित्यनाथ का नाम सामने आया था। योगी करीब 48 प्रतिशत लोगों की पसंद थे।
वहीं, दूसरे नंबर पर केशव प्रसाद मौर्य थे जिन्हें करीब 38 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया था। जबकि मनोज सिन्हा को सिर्फ 4 प्रतिशत लोग यूपी में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते थे। पार्टी ने सर्वे और जनता की पसंद के साथ ही जाने का फैसला किया था।
