Keto Diet Side effects: वर्क फ्रॉम होम के बीच घर बैठे-बैठे और शारीरिक असक्रियता के कारण पिछले कुछ महीनों में अधिकतर लोगों का वजन बढ़ गया है। वैश्विक महामारी को ध्यान में रखते हुए कई लोग जिम जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। अत्यधिक वजन कई बीमारियों को जन्म देता है। ऐसे में लोग हेल्दी रहने के लिए और अपनी ओवरॉल पर्सनैलिटी को बढ़ाने के लिए वजन पर संतुलन बनाए रखना चाहते हैं। घर बैठे लोग वजन कम करने के लिए कई तरह के डाइट को फॉलो करते हैं। इन्हीं में से एक है कीटोजेनिक डाइट जिसे आम भाषा में कीटो डाइट भी कहा जाता है। मोटापे से निजात दिलाने में ये डाइट मददगार तो है लेकिन इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हैं। इस कारण कुछ लोगों को इस डाइट को फॉलो करने की सलाह नहीं दी जाती है।
गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान होने वाली मां को अपनी डाइट और सेहत के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर और संतुलित आहार खाना चाहिए। कीटो डाइट में 70 प्रतिशत फैट, 25 परसेंट प्रोटीन और 5 फीसदी कार्बोहाइड्रेट्स मौजूद होते हैं। इसे फॉलो करने वाले लोगों को कई तरह के खाद्य पदार्थों को खाने से मनाही होती है। इससे महिलाओं में विटामिन डी, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे महत्वपूर्ण न्यूट्रिएंट्स नहीं मिल पाते हैं।
शुद्ध शाकाहारी: शुद्ध शाकाहारी यानी जो लोग डेयरी व एनिमल प्रोडक्ट्स से भी परहेज करते हैं। ये लोग केवल फल, सब्जी व साबुत अनाजों का ही सेवन करते हैं। मगर कीटो डाइट में लोगों को फाइबर और कार्ब्स से भरपूर भोजन नहीं करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में इन लोगों में पोषण की कमी हो सकती है।
किडनी के मरीज: कीटोजेनिक डाइट एक उच्च फैट डाइट है। शरीर से एक्स्ट्रा फैट को निकालने के लिए किडनी पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में जो लोग पहले से किडनी रोग से पीड़ित हैं, उनके लिए कीटो डाइट हानिकारक हो सकती है। यही नहीं, इससे उन्हें कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है।
हार्ट पेशेंट: फैट ज्यादा होने के कारण ये डाइट दिल के मरीजों के लिए भी उपयुक्त नहीं है। अधिक फैट लोगों के हृदय को कमजोर बना सकता है, जिससे कार्डियोवास्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, इस डाइट में लोगों को जिन खाद्य पदार्थों को खाने की सलाह दी जाती है वो भी दिल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
कब्ज़ से पीड़ित लोग: कीटो डाइट फॉलो करने के प्रमुख साइड इफेक्ट्स में से एक है कब्ज़ की परेशानी। इस डाइट को फॉलो करने वाले लोगों के शरीर में फाइबर की कमी हो जाती है, जिससे कॉन्स्टिपेशन हो सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन लोगों को इस डाइट को फॉलो न करने की सलाह देते हैं जो पहले से किसी पाचन संबंधी विकारों से जूझ रहे हों।
