आआइटी बॉम्बे के औद्योगिकी डिजाइन केंद्र से स्नातकोत्तर कर रहे जुल्कार ने अपने दोस्तों और कुछ शिक्षकों के साथ मिलकर कोरोना मरीजों के लिए एक वेंटिलेटर विकसित किया है। उन्होंने इस वेंटिलेटर में आम चीजों उपयोग किया जिनमें प्लाईवुड, दराज की गरारी आदि शामिल हैं। वह पूर्णबंदी से पहले ही गुलमर्ग चले गए थे। इस संबंध में हमने जुल्कार से बात की पेश हैं बातचीत के कुछ अंश…

सवाल : वेंटिलेटर बनाने का विचार कैसे आया?
जुल्कार : जब में गुलमर्ग पहुंचा तो पता चला कि कश्मीर के अस्पतालों में बहुत कम वेंटिलेटर हैं, जो कोरोना मरीजों के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इसके बाद मैंने अपने साथियों आसिफ शाह और पीएस शोएब से संपर्क किया और वेंटिलेटर के विचार पर काम करने के लिए एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया। इसके बाद इस्लामिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आइयूएसटी) के औद्योगिक डिजाइन केंद्र के संयोजक शाहकार नेहवी और एनआइटी के माजिद हमीद कौल की हमें मदद मिली। उन्होंने बताया कि इसके बाद हमने आइयूएसटी में तीन सप्ताह रहकर इस वेंटिलेटर को बनाया।

सवाल : इस वेंटिलेटर को आपकी टीम ने किस तरह बनाया?
जुल्कार : इस वेंटिलेटर का नाम ‘रुहदार’ रखा गया है और इसे बनाने में आसानी से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल किया गया है। इसके कुछ भाग हमने थ्रीडी प्रिंटर से तैयार किए। परीक्षण के बाद जल्द ही इस वेंटिलेटर का इस्तेमाल अस्पतालों में होने लगेगा। हम अपनी इस तकनीक को अस्पतालों को मुफ्त में उपलब्ध कराएंगे।

सवाल : इस कार्य को करने में आपको किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
जुल्कार : जम्मू कश्मीर ने अभी भी 2जी इंटरनेट सेवाएं बहाल हो पाई हैं। ऐसे में हमें हार्वर्ड मेडिकल विश्वविद्यालय में मौजूद अपने मेंटर से बात करने में समस्या आई। इसके अलावा हमें गूगल से सर्च करने में भी बहुत मुश्किल हुई। इसके अलावा विश्वविद्यालय तक पहुंचने में परेशानी हुई लेकिन प्रशासन ने हमारी काफी मदद की।
प्रस्तुति : सुशील राघव