Guru Tegh Bahadur Shaheedi Balidan Diwas 2025: सिखों के 9वें गुरु, गुरु तेगबहादुर का शहीदी (बलिदान) दिवस 24 नवंबर यानी सोमवार को मनाया जा रहा है। उनका जन्म अमृतसर में 21 अप्रैल, 1621 को माता नानकी और सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद के यहां हुआ था। उन्होंने हिंदू धर्म को बचाने के लिए मुगल शासक औरंगजेब से सीधी टक्कर ली थी।

औरंगजेब ने जब कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करने शुरू किए तब गुरु तेग बहादुर जी ने उनकी रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। मुसलमान बनने से इनकार करने पर 24 नवंबर 1675 ईसवीं में गुरु साहिब के शीश को दिल्ली के चांदनी चौक में औरंजेब ने धड़ से अलग कर दिया था। गुरु तेगबहादुर के 57 शबद और 59 श्लोक श्री गुरुग्रंथ साहब में दर्ज हैं। आज बलिदान दिवस पर जानते हैं उनके कुछ प्रेरणादायक विचार।

गुरु तेग बहादुर के अनमोल विचार | Guru Tegh Bahadur ke Anmol Vichar

गुरु तेग बहादुर ने कहा था कि हमेशा महान कार्य छोटे-छोटे कार्यों से बने होते हैं।

एक सज्जन व्यक्ति वह है जो अनजाने में किसी की भावनाओ को ठेस ना पहुंचाएं।

एक सच्चा धर्म हमें सभी के साथ अच्छा बर्ताव करना और समाज की सेवा करना सिखाता है।

हार और जीत यह आपकी सोच पर ही निर्भर है, मान लो तो हार है ठान लो तो जीत है।

गलतियां हमेशा क्षमा की जा सकती हैं, यदि आपके पास उन्हें स्वीकारने का साहस हो।

‘चिंता ताकी कीजिये जो अनहोनी होय’। इस संसार में तो कुछ भी स्थिर नहीं है। चिंता उसकी करो, जो अनहोनी हो।

सफलता कभी अंतिम नहीं होती, विफलता कभी घातक नहीं होती। इनमें जो मायने रखता है वो है साहस।

आध्यात्मिक मार्ग पर दो सबसे कठिन परीक्षण हैं, सही समय की प्रतीक्षा करने का धैर्य और जो सामने आए उससे निराश ना होने का साहस।