Supreme Court On Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई जारी रखते हुए चेतावनी दी कि राज्यों को हर उस मामले में कुछ न करने के लिए मुआवजा देना पड़ सकता है, जिसमें कुत्ते के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मौत होती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उनकी भी जवाबदेही तय की जाएगी।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय बेंच ने की। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “कुत्ते के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले में, राज्य द्वारा भारी मुआवजा तय किए जाने की संभावना है, जबकि हम कुछ नहीं कर रहे हैं। साथ ही, उन लोगों पर भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए जो कह रहे हैं कि हम कुत्तों को खाना खिला रहे हैं। अगर आप ऐसा करते हैं, तो उन्हें अपने घर ले जाएं। कुत्ते इधर-उधर गंदगी क्यों फैला रहे हैं, काट क्यों रहे हैं, लोगों को क्यों डरा रहे हैं।”
सुप्रीम कोर्ट ने किया सवाल
इस मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी भी सवाल किया, “जब एक नौ साल के बच्चे की मौत उन कुत्तों के हमले से हो जाती है जिन्हें एक विशेष संगठन द्वारा पाला-पोसा जाता है, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? क्या उस संगठन को नुकसान की भरपाई के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जाना चाहिए?”
जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की, “मान लीजिए कि एक रेजिडेंशियल सोसायटी है जहां 95% लोग कुत्ते नहीं रखना चाहते, तो क्या कुत्ते रखने वाले 5% लोग सबके लिए फैसला करेंगे? जब नगर निगम अधिकारियों ने कुत्तों को पकड़ने की कोशिश की, तो तथाकथित डॉग लवर्स ने उन पर हमला कर दिया। यहां तक कि अदालतें भी असुरक्षित हो गई हैं।”
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल क्या निर्देश दिया था?
बता दें कि आवारा कुत्ते के काटने की बढ़ती घटनाओं के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंडों, खेल परिसरों और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया और निर्देश दिया कि उन्हें शेल्टर में भेजा जाए। स्वतः संज्ञान लेते हुए आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं की निगरानी कर रही पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कुत्तों को सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के परिसर में प्रवेश करने से रोकें। साथ ही, यह भी कहा गया कि उन्हें उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
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