Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि बेटे के बालिग यानी 18 साल का होने पर पिता से भरण-पोषण का अधिकार खत्म हो जाता है। कोर्ट ने इस आधार पर बेटे के पक्ष में फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने पत्नी के लिए बढ़ाई गई भरण-पोषण राशि को सही ठहराते हुए बरकरार रखा।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने यह फैसला मोअज्जम अली की ओर से दायर याचिका पर दिया है। इसमें याची पति ने फैमिली कोर्ट भदोही के चार अगस्त 2023 के आदेश से पत्नी और बेटे के पक्ष में भरण पोषण की राशि में की गई बढ़ोतरी को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
फैमिली कोर्ट से नहीं मिला कोई नोटिस
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आवेदक को फैमिली कोर्ट से कोई नोटिस या समन नहीं मिला। इतना ही नहीं वकील ने यह भी दलील दी कि बेट बर्थ सर्टिफिकेट के मुताबिक पांच जनवरी को ही बालिग यानी 18 साल का हो चुका था। उसके लिए भरण पोषण का आदेश देना पूरी तरह से अवैध है।
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याचिकाकर्त पर पांच बच्चों की जिम्मेदारी
वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता पर पांच बच्चों की जिम्मेदारी है। ऐसे में गुजारा भत्ता की राशि पत्नी के लिए एक हजार से बढ़ाकर छह हजार और बेटे के लिए पांच सौ से अब चार हजार रुपये देना उसकी क्षमता से बाहर है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद में पाया कि बेटा बालिग हो चुका है। इसी आधार पर कोर्ट ने उसके संबंध में जारी भरण पोषण का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, पत्नी के लिए जो राशि बढ़ाकर छह हजार की गई थी उसे कोर्ट ने आज के समय के हिसाब से ज्यादा नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पति ने इनकम के सोर्स के सबंध में कोई ठोस सबूत नहीं दिए हैं।
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