ब्रिटेन की अदालत ने नॉर्थम्प्टन की मस्जिद के इमाम को 16 वर्षीय नाबालिग बच्चियों का इस्लामी तरीके से निकाह कराने के लिए 15 हफ्ते की निलंबित सजा सुनायी है। अगले 12 महीने तक इमाम को सशर्त रिहाई दी गयी है। इस दौरान अगर इमाम रिहाई की शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें सजा काटनी होगी।

इमाम का नाम अशरफ उस्मानी है और उसकी उम्र 52 साल है। इंग्लैंड में विवाह की न्यूनतम उम्र 18 साल है। यह नियम सेकुलर शादी और मजहबी निकाह, दोनों पर लागू होता है। अदालत में अशरफ उस्मानी ने कहा कि उन्हें इस नए कानून की जानकारी नहीं थी। इंग्लैंड और वेल्स में 2022 में बने कानून के अनुसार विवाह की न्यूनतम उम्र 18 साल कर दी गयी थी। उसके पहले यह उम्र 16 वर्ष थी अगर बच्चों के अभिभावक इसके लिए सहमति देते हैं।

जज अखलाक उर रहमान ने फैसले में कहा कि अशरफ उस्मानी ने अपराध किया है। हालाँकि जज रहमान ने उस्मानी को राहत देते हुए निलंबित कारावास की सजा दी। जज रहमान ने कहा कि अगर उस्मानी रिहाई की शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो यह सजा लागू होगी। अशरफ उस्मानी ने अदालत में स्वीकार किया था कि उन्होंने नवंबर 2023 में नॉर्थम्प्टन सेंट्रल मस्जिद में दो नाबालिगों का निकाह कराया था।

जज रहमान ने कहा कि इस मामले में किसी तरह की हिंसा या जबरदस्ती नहीं हुई थी। किशोरियाँ अपनी मर्जी से अशरफ उस्मानी के पास गई थीं। इसके बावजूद कानून के उल्लंघन के कारण अदालत ने उस्मानी को 15 हफ्ते की जेल की निलंबित सजा सुनाई गई।

अदालत को बताया गया कि दोनों किशोरियों को पहले एक दूसरी मस्जिद में निकाह की अनुमति नहीं मिली थी। इसके बाद उन्होंने नॉर्थम्प्टन में रहने वाले उस्मानी से संपर्क किया। उस्मानी ने गैर-कानूनी रूप से बाध्यकारी इस्लामी निकाह कराने पर सहमति दी और इसके प्रमाण पत्र के लिए 50 पाउंड फीस ली।

उस्मानी की ओर से पेश हुए वकील जेम्स ग्रे ने कहा कि पिछले 20 साल में उनसे निकाह कराने के मामले में यह पहली और एकमात्र गलती हुई।

सुनवाई के दौरान वकील जेम्स ग्रे ने बताया कि अशरफ उस्मानी ने किशोरियों की उम्र जांचने के लिए उनके पासपोर्ट देखे थे। उन्होंने एक आवेदन पत्र भी भरवाया था और मस्जिद के रजिस्टर में सही जानकारी दर्ज की थी।

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वकील ग्रे ने कहा कि इन बातों से साफ है कि उस्मानी को कानून में हुए बदलाव की सही जानकारी नहीं थी और वह गलतफहमी में थे। उनके मुताबिक, अगर उस्मानी को पता होता कि अब शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल कर दी गई है, तो वे ऐसा कभी नहीं करते।

इस पर न्यायाधीश रहमान ने उस्मानी से कहा कि उनका रवैया लापरवाही भरा था और उन्हें कानून बदलने की जानकारी होनी चाहिए थी।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटिश एक्टिविस्ट टोनी रॉबिन्सन ने कहा कि अशरफ उस्मानी ने अपना अपराध स्वीकार किया इसके बावजूद उन्हें जज रहमान द्वारा सजा के बिना जाने दिया गया।

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