सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक वकील महेश तिवारी के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया। महेश तिवारी का पिछले साल अक्टूबर में झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार के साथ बहस का एक वीडियो वायरल हुआ था।

यह बहस बहुत ज्यादा बढ़ गई थी और तब महेश तिवारी ने जस्टिस राजेश कुमार से कहा था कि वह ‘हद पार न करें।’

महेश तिवारी के इस बर्ताव को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के खिलाफ महेश तिवारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे लेकिन शीर्ष अदालत से तिवारी को बड़ा झटका लगा।

सीजेआई सूर्यकांत ने महेश तिवारी की आलोचना करते हुए कहा, ‘वह सुप्रीम कोर्ट से ऐसा आदेश चाहते हैं, जिसे दिखाकर यह कह सकें कि- क्या बिगाड़ लिया मेरा?’

‘मियां बीवी राजी तो काजी क्यों नहीं’, तलाक के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर वह माफी मांगना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करना चाहिए। अगर वह जजों को आंख दिखाना चाहते हैं तो वह ऐसा कर सकते हैं। हम यहां बैठे हैं और हम इसे देखेंगे।’

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट से कहा कि अगर महेश तिवारी माफी मांग लेते हैं तो उनके प्रति सहानुभूति दिखाई जाए।

क्यों हुई थी जज के साथ बहस?

महेश तिवारी की जस्टिस राजेश कुमार के साथ एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान बहस हुई थी। महेश तिवारी अपने मुवक्किल के लिए राहत की मांग कर रहे थे। उनकी मुवक्किल एक विधवा महिला थी जिसकी बिजली की लाइन इसलिए काट दी गई थी क्योंकि उस पर 1.30 लाख रुपये बकाया था।

मामले की सुनवाई के दौरान महेश तिवारी ने कहा था कि उनकी मुवक्किल बिजली के कनेक्शन को दोबारा चालू करने के लिए 25,000 जमा कर देगी लेकिन जस्टिस राजेश कुमार ने अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि उन्हें कुल बकाया राशि का 50% जमा करना होगा।

‘ये कैसी याचिका है’, बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बैन करने की मांग वाली PIL खारिज

अदालत की सुनवाई के दौरान महेश तिवारी ने जिस ढंग से अपनी दलील रखी, उसे लेकर जस्टिस राजेश कुमार ने टिप्पणी की थी। दोनों के बीच अच्छी-खासी बहस हुई थी। अदालत ने झारखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष से महेश तिवारी के बर्ताव का संज्ञान लेने को कहा था।

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने अवमानना का नोटिस जारी किया था।

अरविंद केजरीवाल और अमानतुल्लाह खान को अदालत से किन मामलों में मिली राहत?