बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को अमरावती के एक वेटरनरी डॉक्टर यूसुफ खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। उस पर 2022 में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या का मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर और जघन्य अपराध का है और आम जनता में आतंक फैलाने के लिए गिरोह बनाने का है।
कोल्हे की हत्या 21 जून 2022 को उस वक्त हुई जब वह काम से लौट रहे थे। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर तत्कालीन बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट डाली थी। नुपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद के बारे में टिप्पणियों ने विवाद खड़ा कर दिया था। जस्टिस अजय गडकरी और श्याम चंदक का यह आदेश खान की उस अपील पर आया है जिसमें उन्होंने एनआईए अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
ग्रुप में एकमात्र मुस्लिम व्यक्ति थे
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कोल्हे की एक वेटरनरी की दुकान थी और यूसुफ खान भी एक वेटरनरी डॉक्टर थे और वेटरनरी केमिस्ट वाले उनके व्हाट्सएप ग्रुप में एकमात्र मुस्लिम व्यक्ति थे। वह नियमित तौर पर कोल्हे की दुकान से दवाएं खरीदते थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 14 जून 2022 को कोल्हे ने तत्कालीन बीजेपी प्रवक्ता की एक फोटो के साथ उनकी टिप्पणी के समर्थन में एक मैसेज पोस्ट किया। इससे कथित तौर पर नाराज हो गए।
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एजेंसी ने आगे दावा किया कि खान ने कोल्हे से बदला लेने के लिए कथित तौर पर मैसेज का स्क्रीनशॉट लिया, उस पर भड़काऊ मैसेज लिखा, उसे केमिस्ट की पोस्ट के स्क्रीनशॉट से टैग किया और कोल्हे को बेनकाब करने और उसके खिलाफ नफरत फैलाने के लिए इसे दूसरे व्हाट्सएप ग्रुप पर पोस्ट कर दिया।
खान पर कई धाराओं में दर्ज किया गया था केस
खान पर आईपीसी और यूएपीए के प्रावधानों के तहत हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था। खान की ओर से वकील युग मोहित चौधरी ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल का एकमात्र उद्देश्य बाकी वेटरनरी डॉक्टरों को उनसे दवाएं खरीदना बंद करने के लिए राजी करके कोल्हे के कारोबार को प्रभावित करना था और उस मैसेज को भेजने का कोई इरादा नहीं था।
इसे पढ़ने से कोई भी आसानी से गुस्सा हो जाएगा- जस्टिस चंदक
रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर गौर करने के बाद बेंच ने जस्टिस चंदक ने टिप्पणी की कि अपीलकर्ता ने अपना मैसेज इस तरह से तैयार किया था कि इसे पढ़ने पर कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का ग्रुप आसानी से गुस्सा हो जाएगा और मृतक से बदला लेने का मन बना लेगा। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की, “रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करते हुए, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मृतक द्वारा उनके धर्म के कथित अपमान का बदला लेने के लिए, उसकी बेरहमी से हत्या करके और आम जनता के दिलों और दिमाग में आतंक फैलाने के उद्देश्य से, आरोपियों द्वारा एक अन्य आरोपी के नेतृत्व में एक आतंकी गिरोह का गठन किया गया था, चाहे वे प्रवक्ता की टिप्पणी का समर्थन करते हों या नहीं।” अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, “प्रथम दृष्टया हमारा यह मत है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सच हैं।
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