पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अटेंडेंस के लिए आधार-बेस्ड फेस और जीपीएस सिस्टम का इस्तेमाल करना निजता का उल्लंघन नहीं है। पटना उच्च न्यायालय ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि बिहार के मेडिकल कॉलेजों के फेकेल्टी मेंबर्स के लिए आधार-आधारित चेहरे की पहचान और जीपीएस-बेस्ड अटेंडेंस अनिवार्य करना निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार का इरादा आधार-आधारित उपस्थिति प्रणाली का इस्तेमाल सुशासन के लिए करना है।
जस्टिस बिबेक चौधरी ने राज्य भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत कई डॉक्टरों द्वारा दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है। अदालत के 17 जनवरी के आदेश में कहा गया कि सरकारों का इरादा सुशासन के लिए आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली का उपयोग करना है।
याचिकाकर्ताओं ने आधार-बेस्ड सिस्टम के खिलाफ दिया यह तर्क
याचिका में एनएमसी द्वारा जारी 16 अप्रैल, 2025 की सार्वजनिक सूचना को चुनौती दी गई थी। इस नोटिस में सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को 1 मई, 2025 से उपस्थिति दर्ज करने के लिए अनिवार्य रूप से जीपीएस लोकेशन टैगिंग के साथ फेस-बेस्ड आधार प्रणाली अपनाने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत फ़ैकल्टी मेंबर्स को संस्थान के 100 मीटर के जीपीएस दायरे के भीतर एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी होती थी। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा जारी एनएमसी नोटिस और उसके बाद के निर्देशों को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। उन्होंने पहले से एकत्र किए गए किसी भी डेटा को हटाने की भी मांग की।
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बिहार सरकार ने बचाव में क्या कहा?
वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता जनरल पीके साही ने अधिवक्ता पीएन शर्मा के साथ राज्य के इस कदम का बचाव करते हुए तर्क दिया कि इस सिस्टम के पीछे के व्यावहारिक उद्देश्य पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आधार-बेस्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को 2020 से राजपत्र अधिसूचनाओं और परिपत्रों के माध्यम से धीरे-धीरे लागू किया गया है। वकील ने कहा कि उंगलियों के निशान पर आधारित सिस्टम की कमियों को दूर करने के लिए जीपीएस टैगिंग के साथ चेहरे की पहचान को अपनाया गया था।
पटना हाईकोर्ट का फैसला
इस पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि एक निराधार आशंका मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेषाधिकार रिट जारी करने का आधार नहीं हो सकती। याचिकाकर्ताओं को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का विशिष्ट मामला प्रस्तुत करना होगा। किसी व्यक्ति की निजता केवल इसलिए खत्म नहीं हो जाती क्योंकि वह व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर है। निजता के अधिकार का उल्लंघन करने के अलावा, याचिकाकर्ताओं ने आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को चुनौती देते हुए किसी अन्य मुद्दे को सामने नहीं लाया है। देश भर के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू है।
