भारतीय रेलवे औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की ओर कदम बढ़ा रहा है। अब अधिकारियों के लिए बंद गले का काला कोट नहीं होगा, स्वदेशी वस्त्र अपनाए जाएंगे। रेलवे ब्रिटिश काल के नामों को भी बदलेगा। कर्मचारियों के कौशल विकास पर ध्यान दिया जाएगा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। 2047 तक विकसित रेल तैयार करने की योजना है। 1.2 लाख भर्तियां होंगी और ट्रेनों की गति बढ़ाई गई है।