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महिला सुरक्षा बनाम निर्भया फंड

निर्भया कांड के बाद हरकत में आई केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा के नाम पर 1000 करोड़ रुपए की राशि का निर्भया फंड घोषित किया, जिसमें बाद में 1000 करोड़ रुपए की राशि और जोड़ी गई। लेकिन इसे खर्च न किए जा सकने पर सवाल उठते रहे, सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की।

Author नई दिल्ली | December 17, 2016 2:00 AM
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी

निर्भया कांड के बाद हरकत में आई केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा के नाम पर 1000 करोड़ रुपए की राशि का निर्भया फंड घोषित किया, जिसमें बाद में 1000 करोड़ रुपए की राशि और जोड़ी गई। लेकिन इसे खर्च न किए जा सकने पर सवाल उठते रहे, सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की। हालांकि, इस फंड के लिए नोडल मंत्रालय केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस लोकसभा सत्र में ब्योरा पेश किया है कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से कुल 15 परियोजनाओं के प्रस्तावों का आकलन कर निर्भया फंड के अंतर्गत उनकी अनुशंसा की गई है। वहीं, माकपा नेता वृंदा कारत ने फंड पर सरकार के पिछले चार साल के रवैये को निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। इन सवालों पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा, ‘जब से यह फंड हमारे पास आया है हमने एकल खिड़की केंद्र (वन स्टॉप सेंटर) पर काम करना शुरू कर दिया है, जिसे ‘सखी’ का नाम दिया गया है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा की शिकायतों को लोग सामने रखने से हिचकते हैं क्योंकि पुलिस के पास जाने में समस्या है, वकील और डॉक्टर के पास जाने की समस्या है, खर्चे हैं, लेकिन अब हर समस्या का समाधान एक ही केंद्र पर है। अभी 2000 करोड़ रुपए का आबंटन है, जरूरत पड़ने पर सरकार और राशि देगी’।

लोकसभा में पेश ब्योरे के मुताबिक, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास आयोग का इस फंड में ‘सखी’ के लिए फिलहाल 119.71 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है जिसके तहत दूसरे चरण में 150 केंद्र खोेले जाने हैं। वहीं महिला हेल्पलाइन को पूरे देश में विस्तार देने के लिए 69.49 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लगभग 1172 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है जिसमें केंद्रीय पीड़िता मुआवजा फंड (200 करोड़), महिलाओं के प्रति अपराध के लिए जांच इकाई (324 करोड़), महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध की रोकथाम परियोजना (244.32 करोड़), राष्ट्रीय आपात प्रतिक्रिया प्रणाली (नेशनल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम) (321.69 करोड़) और संगठित अपराध जांच एजंसी (83.20 करोड़) संबंधी परियोजनाएं शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस की ओर से लगभग 30 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शामिल है, जिसमें जिला और उपखंडीय पुलिस चौकी के स्तर पर प्रोफेशनल सलाहकार बहाल किया जाना (6.20 करोड़) और महिला, बच्चों व उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष इकाई बनाया जाना शामिल है। वहीं दिल्ली सरकार की तरफ से डीटीसी और क्लस्टर की 6655 बसों और बसों के लिए 100 आधुनिक जमावड़ों की जगह पर सीसीटीवी कैमरों व जीपीएस उपकरण के लिए कुल 141.87 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शामिल है। हालांकि, मेनका गांधी ने बसों में सीसीटीवी कैमरे को नाकाफी बताते हुए कहा है कि इस फंड का आबंटन नहीं किया जा रहा है।

रेल मंत्रालय की ओर से 500 करोड़ रुपए की समेकित आपात प्रतिक्रिया प्रबंधन प्रणाली (इंटीग्रेटेड इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम) की परियोजना शामिल है। वहीं पैनिक बटन के लिए इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की तरफ से कारों और बसों में पैनिक स्विच आधारित सुरक्षा उपकरण के लिए 3.499 करोड़ रुपए की परियोजना है। आंध्र प्रदेश परिवहन विभाग की तरफ से सार्वजनिक परिवहन के साधनों में ‘अभया प्रोजेक्ट’ के लिए 138.49 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है। हरियाणा सरकार की तरफ से महिला पुलिस वालंटियर के लिए 1.29 करोड़ का प्रस्ताव है, इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन हो चुका है और इन वालंटियर्स को केंद्रीय मंत्रालय की तरफ से मासिक राशि दी जाएगी।

माकपा नेता वृंदा कारत ने फंड के इस्तेमाल पर प्रश्न उठाते हुए कहा, ‘यह फंड हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए सामाजिक अवसंरचना तैयार करने के लिए बनाया गया था, इससे उनका पुनर्वास किया जाना था, लेकिन चार साल में अभी तक कुछ नहीं हुआ है, केवल योजना चल रही है, राज्यों में एक-दो एकल खिड़की केंद्र (सखी) खोलने से क्या होगा, ये केंद्र प्रखंड स्तर पर तो दूर जिला स्तर पर भी नहीं खुल रहे। सार्वजनिक यातायात अभी भी इतना असुरक्षित है, सीसीटीवी कैमरों, अंधेरी जगहों को प्रकाशित किए जाने के मुद्दे हैं’। उन्होंने निर्भया फंड से महिला पुलिस वालंटियर कार्यक्रम शुरू किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह गृह मंत्रालय के फंड से होना चाहिए था, पुलिस में भर्ती तो हो नहीं रही, कुछ पैसे देकर वालंटियर से काम चलाएंगे। उन्होंने सरकार में इच्छाशक्ति के अभाव का आरोप लगाया।

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