केंद्र सरकार ने बुधवार को साफ कर दिया कि देश भर के खिलाड़ियों की शिकायतों को सुलझाने के लिए आनलाइन तंत्र स्थापित करने की उसकी योजना नहीं है। खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि हाल में कुछ खिलाड़ियों के साथ घटी घटनाओं को लेकर चिंता जताई थी। वे केरल के साई सेंटर में घटी घटना का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि केरल के अलपुझा में खिलाड़ियों के साथ घटी घटनाओं की जांच करवाई गई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं। देश भर में खिलाड़ियों के लिए कोई आनलाइन शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना करने की सरकार की योजना के बारे उनसे सवाल किया गया था।
सोनोवाल ने एक दूसरे सवाल के जवाब में बताया कि अमेरिका में जून में आयोजित विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए 31 सदस्यीय टीम को मंजूरी प्रदान की गयी थी। इन 31 सदस्यों में से तीन के पास पहले से ही अमेरिका के वैध वीजा थे। बाकी 28 सदस्यों के वीजा के लिए अमेरिका से अनुरोध किया गया था।
सोनोवाल के मुताबिक दिल्ली के अमेरिकी दूतावास ने नौ सदस्यों को वीजा प्रदान कर दिया और बाकी के आवेदनों को खारिज कर दिया गया। इसका कारण यह बताया गया कि आवेदक अमेरिकी दूतावास को अमेरिका में अपने कार्यकलापों के प्रयोजन का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। सोनोवाल ने बताया कि टीम के बाकी सदस्यों को वीजा के लिए अनुरोध करते हुए अमेरिकी दूतावास को एक ‘वीजा नोट वर्बेल’ भेजा गया। लेकिन इसके बाद भी 19 खिलाड़ियों को वीजा नहीं दिया गया।
सोनोवाल ने यह भी बताया कि ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम’ (टीओपी) योजना का मकसद ओलंपिक खेलों खासकर रियो ओलंपिक 2016 के लिए संभावित पदक विजेता खिलाड़ियों की पहचान करनी है। इस योजना के तहत विभिन्न खेलों से जुड़े अब तक 102 खिलाड़ियो का चयन किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा राज्य की नुमाइंग्दगी के आधार पर नहीं बल्कि प्रतिभा और पदकों की संभावना के आधार पर किया गया है।